चाईबासा, जासं। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने मंगलवार को सेल की गुवा खदान के सीजीएम बीके गिरी से उनके कार्यालय में जाकर मुलाकात की। मुलाकात के दौरान मधु कोडा़ ने सबसे पहले गुवा खादान के तमाम रिक्त पदों पर स्थानीय बेरोजगारों के अलावा सेलकर्मियों के आश्रित, सप्लाई, नोटसीट व ठेका मजदूरों, खादान से प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को नौकरी में प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने प्रबंधन ने यह भी मांग किया कि खादान से प्रभावित गांवों का सर्वागीण विकास विशेष प्राथमिकता के आधार पर सीएसआर के तहत किया जाए।

स्थानीय लोगों को भर्ती देने की मांग

बातचीत में मधु कोडा़ ने कहा कि आने वाले 3-4 वर्षों के दौरान लगभग 500 स्थायी सेलकर्मी, लगभग 300 सप्लाई व ठेका मजदूर एंव लगभग 70 नोट शीट पर काम करने वाले मजदूर सेवानिवृत हो जायेंगे। वर्तमान में सेल की गुवा प्रबंधन के अंदर लगभग 700 पद रिक्त है, जिस पर प्रबंधन द्वारा बहाली नहीं किया जा रहा है जो कि गलत है। इन सभी पदों पर अविलम्ब बहाली करने तथा बहाली में उक्त आधार पर शत फीसदी स्थानीय लोगों को बहाल करने के लिये कहा गया है। इस वार्ता में मधु कोड़ा के अलावे सीजीएम बीके गिरी, प्रशासनिक व कार्मिक विभाग के अधिकारी एनके झा, केशव पाठक, राजू सांडिल सहित अन्य मौजूद थे।

सड़क बनाने में जमकर हो रही है धांधलेबाजी

चाईबासा। टोंटो प्रखंड अन्तर्गत टोंटो पंचायत के ग्राम टेन्सेरा से पोखरीबुरू वाया मसुरीबुरू तक तक बन रही सड़क में अनियमिता बरती जा रही है। साथ ही निर्माण कार्य में लगे मजदूरों का मजदूरी भी बकाया है। इस संबंध में टोंटो पंचायत की मुखिया दीपिका लागुरी ने डीसी को ज्ञापन सौंप कर सड़क निर्माण में हो रही अनियमितता को जांचकर कार्य को पूर्ण कराते हुए बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनायी जा रही है। पूराप इलाका नक्सल प्रभावित क्षेत्र भी है। मैंने भ्रमण के दौरान देखा कि उक्त सड़क का आरसीसी पुलिया बीचों-बीच टूटा हुआ है। आनन-फानन में अधूरी पुलिया को तोड़कर बाल मजदूरों से पुनः निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही उक्त सड़क में करीब 500-600 फीट अर्धनिर्मित छोड़ दिया गया है। यह सड़क देखकर पता चलता है कि छह महीना भी सड़क नहीं चलेगी। जब इन सभी विषयों पर संवेदक से बात की तो उनका कहना है कि सभी प्रकार का निर्माण कार्य गुणवतापूर्वक पूरा किया गया है। जबकि हकीकत यह है कि मजदूरी 150-200 रुपये कम देने के बाद भी बकाया है और सड़क यहां-वहां टूटने लगी है।

Edited By: Madhukar Kumar