जासं, जमशेदपुर : सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) कार्यालय के सामने गुरुवार दोपहर उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। जब झारखंड सिख प्रतिनिधि बोर्ड के अध्यक्ष गुरुचरण सिंह बिल्ला अपने समर्थकों के साथ सीजीपीसी के प्रधान नियुक्त गुरमुख सिंह मुखे का विरोध करने पहुंचे थे। इस दौरान मुखे और बिल्ला के बीच तीखी नोक-झोंक व धक्का-मुक्की हुई। साथ ही दोनों ने एक-दूसरे को देख लेने की धमकी तक दे डाली। इसके बाद एक-दूसरे के खिलाफ साकची थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

सीजीपीसी की ओर से 13 माह बाद जेल से जमानत पर छूटे गुरमुख सिंह मुखे को फिर से प्रधान नियुक्त किया है। गुरुचरण सिंह बिल्ला और उनके समर्थक इसका ही विरोध कर रहे हैं। इसके विरोध में बिल्ला अपने समर्थकों के साथ सीजीपीसी कार्यालय के बाहर जपुजी साहब का पाठ और सतनाम श्री वाहे गुरु का जाप करने जुटे थे। बिल्ला के अनुसार मुखे और उनके समर्थकों को यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने टेंट व दरी वालों को भाग दिया। दोबारा दरी लेकर पहुंचे मोंटी अग्रवाल के साथ भी बदसलूकी की। इसके कारण वहां का माहौल गरमा गया। दोनो के बीच तू-तू, मैं-मैं से से बात तीखी नोक-झोंक में बदल गई। बिल्ला का आरोप है कि मुखे और उनके समर्थकों ने पुलिस के सामने ही उनके साथ गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी।

उन्होंने मामले की लिखित शिकायत उपायुक्त, एसएसपी सहित एसडीएम से की है। उनकी मांग है कि मुखे और अंबे आपराधिक छवि के लोग हैं इसलिए इनसे सीजीपीसी कार्यालय को मुक्त कराया जाए। इन दोनों से प्रधान सेवादार डरे हुए हैं और खुलकर कहने से डर रहे हैं। सीजीपीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वालों में बिल्ला के अलावा सुरजीत सिंह, अमरजीत सिंह, सत्येंद्र सिंह रोमी, सुखविदर सिंह राजू, शमशेर सिंह सोनी, जोगिदर सिंह जोगी, कुलदीप सिंह, जसवीर सिंह मत्तेवाल, गुरमीत सिंह लाडी, त्रिलोचन सिंह सहित अन्य इस पाठ अभियान में शामिल थे।

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कोट ::

गुरमुख सिंह मुखे पंथ हित में सीजीपीसी प्रधान पद से हटे और दागदार इतिहास के साझीदार नहीं बने। पटना तख्त ने भी जत्थेदार ने भी आदेश दिया है कि जब तक न्यायालय से मुखे बरी नहीं हो जाते। तब तक वे पंथिक संस्था में न तो पदाधिकारी बन सकते हैं और न ही किसी तरह की बयानबाजी कर सकते हैं।

-गुरुचरण सिंह बिल्ला, अध्यक्ष, सिख प्रतिनिधि बोर्ड

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विरोध प्रदर्शन कर समाज को गुमराह न करें : मुखे

पूरे मामले में सीजीपीसी के प्रधान मुखे का कहना है कि गुरुचरण सिंह बिल्ला ने उन्हें एक आपराधिक षडयंत्र के तहत केस में फंसाया है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए वे न्यायालय का सम्मान करें। मुझे दोषी साबित करने के लिए कोर्ट में गवाही कराएं। न कि विरोध प्रदर्शन कर समाज को गुमराह करें। जहां तक मुझे फिर से प्रधान प्रतिनियुक्त करने की बात है तो तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के जत्थेदार सिंह ज्ञानी रंजीत सिंह के समक्ष अपना पक्ष रखा। इसके बाद तख्त साहब ने मुझे शिरोपा देकर सम्मानित कर मुझे समाज को एकजुट करने का निर्देश देते हुए अपनी सेवा वापस संभालने की जिम्मेदारी सौपी है। हम जत्थेदार जी के हुक्म का पालन करेंगे। का हुक्म होगा उनका पालन करेंगे। इसके अलावे मुझे पटना तख्त, तख्त दमदमा साहेब, अकाल तख्त से भी सरोपा देकर सम्मानित किया गया। मेरे खिलाफ आवाज उठाने वाले यदि चाहे तो तख्त श्री पटना साहेब, दमदमा साहेब, अकाल तख्त में जाकर पूछ सकते हैं कि आखिर उन्हें क्यों शिरोपा देकर सम्मानित किया।

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पुलिस को सौपा सीसीटवी फुटेज

इस पूरे मामले में सीजीपीसी की ओर से सिटी एसपी सहित साकची थाने को कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज सौप कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

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मुखे ने बिल्ला व मनोज खत्री के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

पूरे मामले को लेकर मुखे ने बिल्ला व मनोज खत्री सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। मुखे का कहना है कि बिल्ला किसी भी गुरुद्वारा के कार्यकारिणी में शामिल नहीं है तो आखिर वे किस हैसियत से सीजीपीसी कार्यालय में प्रदर्शन करने पहुंचे थे। उनके साथ मात्र तीन गुरुद्वारे के प्रतिनिधि थे बाकी सभी आपराधिक छवि वाले लोग थे जिनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग जिला प्रशासन से की गई है। वहीं, बिल्ला समर्थकों का आरोप है कि वे शांतिपूर्वक जाप कर रहे थे। अंबे ने पहले उनके साथ हाथापाई की जिसके बाद माहौल गरमाया।

Edited By: Jagran