जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : पोटका स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टागराईन के कुल 174 बच्चों ने पहली बार ट्रेन की सवारी करने के लिए न केवल बीस तक का पहाड़ा याद किया बल्कि ट्रेन की सवारी के उत्साह में भोर 3:00 बजे से उठकर अपने माता-पिता को भी उठाया और जल्दी तैयार होने और स्टेशन पहुंचने के लिए नाको-दम कर दिया। कुल 174 बच्चे और 47 माता-पिता ट्रेन आने की घटी बजने से एक घटा पहले ही हल्दीपोखर स्टेशन पर मौजूद थे।

हल्दीपोखर स्टेशन पर मंगलवार भोर से ही टंगराईन सरकारी स्कूल एवं आसपास के स्कूलों के भी उत्साहित बच्चों ने पूरे स्टेशन और आसपास के माहौल को पहाड़ामय और गणितमय कर दिया। बच्चे इतने उत्साहित थे कि उन्होंने कई रेलवे के कर्मचारियों को भी शायद बीस तक का पहाड़ा याद करा दिया होगा।

यह अवसर प्रदान किया उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टागराईन के प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी व उनके शिक्षकों ने। इस अनूठे प्रयोग की सबने तारीफ की। यह प्रयोग न केवल सफल साबित हुआ, बल्कि इसने यह भी प्रमाणित किया कि बच्चे एवं अभिभावक प्रकृति से शिक्षा और ज्ञान के अनुरागी होते हैं, जरूरत है बस उन्हें एक सही नेतृत्व देने की और कब क्या करना है यह बताने की।

उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टंगराईन द्वारा बच्चों से यह वायदा किया गया था कि उन बच्चों को हल्दीपोखर से बादामपहाड़ तक की ट्रेन यात्रा करायी जाएगी, जो बीस तक का पहाड़ा याद कर लेते हैं। यह घोषणा इतनी प्रभावकारी साबित हुई कि अधिकाश बच्चों ने कड़ी मेहनत कर देखते ही देखते बीस तक का पहाड़ा रट लिया।

स्कूल प्रबंधन ने वायदा निभाते हुए बुधवार को कुल 174 छात्र-छात्राओं एवं साथ में 47 अभिभावकों को हल्दीपोखर से बादामपहाड़ तक की ट्रेन सवारी करायी। उत्साहित बच्चों ने ट्रेन की इस सवारी का भरपूर आनंद लिया। रास्ते भर वे एक-दूसरे को पहाड़ा भी सुनाते रहे और साथ ही ट्रेन पर चढ़ने के अनुभव के बारे में एक-दूसरे को बताते भी रहे। अभिभावकों ने भी बच्चों के साथ ट्रेन की सवारी करने के इस अवसर का जमकर आनंद लिया।

स्कूल प्रबंधन ने 20 का पहाड़ा याद करने पर ट्रेन की सवारी कराने के इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए इसे वार्षिक कार्यक्रम बनाने का निर्णय लिया है। इस पूरे कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं विभिन्न प्रकार की व्यवस्था का ध्यान रखने, परिवहन तथा बच्चों की सुरक्षा पर नजर रखने एवं पूरी योजना के क्रियान्वयन में अहम योगदान वार्ड सदस्य मोगला मांझी, सुराय मांझी, उज्जवल मंडल, सुशीला टुडू, सुशील मुंडा, पूर्व मुखिया राजाराम मुंडा, सुबोल दास, प्रणव भकत, बीजो सरदार, जीतेन सरदार, सीता रानी, सुहासिनी भगत, सुदन खंडवाल एवं निमाई दास का योगदान सराहनीय रहा।

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