जमशेदपुर, निर्मल प्रसाद। Weekly News Roundup Jamshedpur Busniess, Buzz जुस्को श्रमिक यूनियन में पिछले शनिवार को आमसभा में जो नौटंकी हुई वह सर्वविदित है। बाहरी होने के बावजूद रघुनाथ पांडेय ने (जिनका को-ऑप्शन होना था) खुद मंच संचालन किया। कोषाध्यक्ष की उपस्थिति के बावजूद खुद ही आय-व्यय सहित अपने कार्यो का गुणगान किया।

शायद इसलिए कि रघुनाथ पांडेय को अपने सिपाहसलारों पर भरोसा नहीं है। इसलिए खुद आमसभा में जमे रहे। उन्हें डर था कि यदि विरोध हुआ और को-ऑप्शन का प्रस्ताव यदि गिर गया तो इनके ट्रेड यूनियन राजनीति का अंत निश्चित है। कंपनी से मिलने वाली सारी सुविधाएं बंद हो जाएंगी सो अलग। इसलिए नैतिकता की दुहाई देने वाली टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज कंपनी परिसर में उन्होंने अनैतिकता का ऐसा इतिहास लिखा जिसे अब विपक्ष से लेकर कर्मचारी तक नहीं पचा पा रहे हैं। अब सभी इस इंतजार में हैं कि मतदान में रघुनाथ पांडेय को हरा कर ही यूनियन से बाहर किया जा सके।

मिट्टी के माधव, कागज के शेरपिछले दिनों टाटा वर्कर्स यूनियन के वाट्स एप ग्रुप में काफी चर्चा का विषय रहा। एक कमेटी मेंबर ने डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद व महामंत्री सतीश की तस्वीर क्या डाली, बहस छिड़ गई। यूनियन के सहायक सचिव नितेश ने दोनों नेताओं के महिमा मंडन में लिखकर डाला कि ये हैं दो शेर, यूनियन के भविष्य। गलती का एहसास हुआ तो तुरंत अपनी पोस्ट हटा दी। इस पर कोक प्लांट के कमेटी मेंबर एसएन शर्मा ने टिप्पणी कर दी कि मिट्टी के माधव, कागज के शेर। उनका यह लिखना था कि दोनों नेताओं के समर्थक एसएन शर्मा पर टूट पड़े। कुछ ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा तो कुछ ने सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने का आरोप लगाया। लेकिन, शर्मा का तर्क था कि ग्रेड रिवीजन में डीए फ्रिज, मेडिकल एक्सटेंशन बंद, इनके कार्यकाल में हुए। पहले ये ही काफी दहाड़ते थे, अब खुद को निर्दोष बता रहे हैं।

टिस्को मजदूर यूनियन का अध्यक्ष कौन

टिस्को ग्रोथ शॉप की मान्यता प्राप्त यूनियन टिस्को मजदूर यूनियन में पिछले दिनों तख्तापलट हुआ। इंटक के राष्ट्रीय सचिव राकेश्वर पांडेय को सेवानिवृत्त होने के बाद बाहर का रास्ता दिखाया गया। पर, तीन मार्च को टाटा स्टील में संस्थापक जेएन टाटा को श्रद्धांजलि देने का समय आया तो सेवानिवृत्त हो चुके राकेश्वर पांडेय का नाम टिस्को मजदूर यूनियन प्रतिनिधि के रूप में लिया गया। इससे यूनियन के बाकी नेताओं के कान खड़े हो गए। महामंत्री से अध्यक्ष बने शिवलखन को शायद इसका पूर्वानुमान था, इसलिए कार्यक्रम से गायब रहे, ताकि राकेश्वर पांडेय फिर से प्रबंधन की मदद से यूनियन में काबिज न हो जाएं। उनका कहना है कि प्रक्रिया संविधान सम्मत हुई। आमसभा बुला कर उन्हें अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने कार्यकारिणी में हुए बदलाव की जानकारी ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को दे दी है। इसके बावजूद कुछ लोग साम, दाम, दंड, भेद से यूनियन में वापसी की जुगत लगा रहे हैं।

करने लगे खुद का गुणगान

टाटा वर्कर्स यूनियन ने गत दिनों स्थापना के शताब्दी वर्ष पर समारोह का आयोजित किया। इसका विषय था- भविष्य की यूनियन कैसी हो? इसमें यूनियन के पास भविष्य में किस तरह की चुनौतियां आएंगी, विषय पर टाटा वर्कर्स यूनियन के डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय, टाटा मोटर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह, सिएट टायर अध्यक्ष एसके यादव व टाइटन यूनियन के एसएलएन मूर्ति पैनल में शामिल थे। कई यूनियन प्रतिनिधियों से भरे सभागार में दर्शकों को उम्मीद थी कि मंचासीन नेता भविष्य में यूनियन को आने वाली चुनौतियों, आइआर पर अपनी बात रखेंगे। लेकिन, सभी ने अपने यहां के बेस्ट प्रैक्टिस (प्रबंधन के सहयोग से हुए बेहतर कार्यो) का गुणगान किया। किसी ने लीव बैंक, तो किसी ने मातृत्व अवकाश का उदाहरण दिया। प्रबंधन के वरीय अधिकारियों की उपस्थिति में इस डर से कुछ नहीं कह पाए कि कुछ बोल दिया तो कर्मचारियों से पहले उनका भविष्य अंधकारमय न हो जाए।

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