जमशेदपुर, जासं। Jharkhand Assembly Election 2019 पूर्वी सिंहभूम के छह विधानसभा क्षेत्रों का यह इतिहास रहा है कि जिन सीटिंग विधायकों का टिकट कटा और उन्होंने दूसरी पार्टियों का दामन थाम कर चुनाव लड़ा, वे हारने के बाद गुमनाम हो गए।

हाल के दिनों में झारखंड विधानसभा में कई नेता एक दल से दूसरे दल में कूद फांद कर रहे हैं। कई नेताओं का अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि पार्टी उन्हें टिकट देगी या उनका टिकट काट देगी। ऐसे नेता यदि दूसरी पार्टी का दामन थाम कर चुनाव लडऩे की सोच रहे हैं तो उन्हें एक बार इतिहास के पन्नों को पलट कर देख लेना चाहिए क्योंकि यह इतिहास रहा है कि पूर्वी जमशेदपुर से सिटिंग एमएलए (विधायक) दीना नाथ पांडेय का टिकट कटा था और उसके बाद 1995 में रघुवर दास को पहली बार टिकट दिया गया। वहीं, 2005 में निवर्तमान वित मंत्री मृगेंद्र प्रताप सिंह का टिकट काटकर सरयू राय को टिकट मिला। इसके बावजूद दीना नाथ पांडेय ने शिवसेना से और मृगेंद्र प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से चुनाव लड़ा लेकिन वे हार गए। क्षेत्र की जनता ने छवि के बदले पार्टी कैडर को तरजीह दी। चुनाव हारने के बाद दोनो नेता गुमनामी में खो गए। मार्च 2005 को मृगेंद्र प्रताप सिंह जबकि 11 जनवरी 2019 को दीना नाथ पांडेय का निधन हो गया।

1995 में दीना नाथ शिवसेना से लड़े थे चुनाव

उस समय किसे मिले थे कितने मत

  • रघुवर दास (भाजपा) 26,880 मत, 22.10 प्रतिशत
  • केपी सिंह (कांग्रेस) 25,779 मत, 21.19 प्रतिशत
  • राधे श्याम प्रसाद (जनता दल) 22,669 मत, 18.64 प्रतिशत
  • दीना नाथ पांडेय (शिवसेना) 17,175 मत, 14.12 प्रतिशत

2005 में मृगेंद्र प्रताप सिंह राजद से लड़े थे चुनाव

उस समय किसे मिले थे कितने मत

  • सरयू राय (भाजपा) 47,428 मत
  • बन्ना गुप्ता (सपा) 34,733 मत
  • हिदायतुल्ला खान (लोजपा) 34,124 मत
  • आयसा अहमद (निर्दलीय) 19,269 मत
  • मृगेंद्र प्रताप सिंह (राजद) 5,588 मत 

Posted By: Rakesh Ranjan

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