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जमशेदपुर/ गालूडीह(जेएनएन)। पहले महंत के शव को जबरन समाधि से निकालकर तीन सौ मीटर दूर दफनाया गया और अब किया गया शुद्धिकरण। यह सब हुआ कोल्हान के प्रसिद्ध दलमा शिव मंदिर में। मंदिर के शुद्धिकरण के लिए दो राज्यों झारखंड और पश्चिम बंगाल से भूमिज समाज के लोग रविवार को जुटे थे।

समाज के लोग पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल क्षेत्र के गालूडीह में जमा हुए और वहां से समूह में दलमा के लिए कूच किया। दलमा पहाड़ पर स्थित यह मंदिर पटमदा थानाक्षेत्र में पड़ता है। लोगों की अगुवाई अजीत सिंह सरदार और कष्णा सिंह सरदार कर रहे थे।

गौरतलब हो कि मंदिर के महंत भीमानंद सरस्वती का निधन पिछले महीने यानी सितंबर की 21 तारीख को 92 वर्ष की आयु में हो गया था। उन्‍हें साधु-संतों ने सर्वसहमति से मंदिर परिसर में ही समाधि दे दी। तर्क यह कि इसी मंदिर में भीमानंद सरस्‍वती ने पूरी जिंदगी गुजार दी, इसलिए समाधि के लिए दूसरा उपयुक्‍त जगह हो ही नहीं सकता। समाधि के दो दिन बाद लोगों का समूह मंदिर पहुंचा और जबरन समाधि से शव को निकालकर तीन सौ मीटर दूर दफना दिया। ऐसा करने वाले लोग भूमिज समाज के थे। आरोप है कि मंदिर के साधु- संतों के साथ मारपीट भी की गई।

क्या कहता है भूमि समाज

भूमिज समाज का कहना है कि जहां मंदिर अवस्थित है व जमीन उनकी है। ऐसे में मंदिर परिसर में समाधि का फैसला लेने का हक दूसरे का नहीं। तर्क यह भी दिया गया कि मंदिर परिसर में महंत को समाधि देने में मंदिर अशुद्ध हो गया। इसलिए रविवार को मंदिर का विधिवत शुद्धिकरण किया गया। समाज का कहना है कि वे अब मंदिर का संचालन करेंगे। इसे लिए वकायदा संचालन समिति का गठन भी किया गया।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

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