जमशेदपुर (जागरण संवाददाता)। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले बीडीओ नागेंद्र तिवारी (उम्र 38) ने रविवार की रात जुगसलाई फाटक के पास ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। चर्चा यह है कि उन्‍होंने बालू माफिया की धमकी से परेशान होकर ऐसा कदम उठाया।

हालांकि नागेंद्र के परिजन इसे हत्या मान रहे है और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे है। जुगसलाई पुलिस ने शव को पटरियों से उठाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सोमवार की सुबह बीडीओ के रुप में जब नागेंद्र तिवारी की पहचान हुई तो पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की पूरी टीम पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गई।

भाई के घर से नाश्‍ता कर निकले थे, पटरियों पर मिला शव

रविवार की सुबह करीब दस बजे जेल चौक स्थित भाई के आवास से नाश्ता कर अपने छात्र उमाशंकर के साथ वह बाइक में बैठकर निकले थे। कुछ देर के बाद उमाशंकर उन्हें जेल चौक छोड़कर चले गए। जब देर शाम तक उमाशंकर घर नहीं पहुंचे और उनका मोबाइल भी स्वीच आफ आने लगा तो साकची थाना में एक सनाह दर्ज कराया गया। रात में जब जुगसलाई फाटक के पास शव मिलने की सूचना मिली तो परिजनों को साकची पुलिस ने सूचना दी। रात होने के कारण शव की  पहचान नहीं हो पा रही थी। इस कारण शव की पहचान परिजनों ने सुबह की।

देवघर के पालोझुड़ीप्रखंड में  थे पदस्‍थापित

बीडीओ नगेंद्र तिवारी वर्तमान में देवघर के पालोझुड़ीप्रखंड में कार्यरत थे। कुछ दिन पहले ही पालझुड़ी प्रखंड में उनको शिकायत मिली थी कि मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी चल रही है। इसके बाद उन्होंने निरीक्षण करना शुरु कर दिया। उनके निरीक्षण से मुखिया, पंचायत सचिव और रोजगार सेवकों में दहशत व्याप्त होने लगी है और उनलोगों ने कई बार इन्हें निरीक्षण करने से मना भी किया। जबकि बीडीओ नागेंद्र तिवारी ने साफ कह दिया था कि कोई भी गैर कानूनी काम वह होने नहीं देंगे। 

भतीजे ने कहा-धमकियों से रहते थे परेशान

बीडीओ का भतीजा सुमित कुमार ने बताया कि मुखिया दाउद आलम द्वारा नागेंद्र तिवारी को धमकी देनी शुरु कर दी। इसके कारण वे तनाव में  रहने लगे। रात में घर में सोते भी थे तो दाउद का नाम नींद में बड़बड़ाते थे। भतीजा ने बताया कि नागेंद्र तिवारी प्रशासनिक कार्य प्रणाली से भी  परेशान थे। यह समझ मे नहीं आ रहा है कि चाचा नगेन्द्र दूसरों को जिंदगी देने वाला खुद की जान नहीं ले सकता। हमें शक है कि चाचा नागेंद्र ने आत्महत्या नहीं की उनकी हत्या की गई है। पुलिस इसकी जांच करें। उन पर बालू माफियाओं का दबाव था चार साल में कई बार उनका ट्रांसफर हो चुका था। उन्होंने चाईबासा बालू माफियाओं पर अंकुश लगाया तो उनका ट्रांसफर देवघर पालोजोरी करा दिया गया था।

कई छात्रों को ट्यूशन पढ़ा कर अफसर बना दिया

चाईबासा का छोटा सा ब्लॉक तांतनगर में नागेंद्र तिवारी ने लाइब्रेरी खोलकर बच्चों को खुद ही पढ़ाना शुरू किया नेतरहाट में बच्चों का एडमिशन कराया और कई बच्चों को अफसर बना दिया। उनकी मौत की खबर सुनकर पोस्टमार्टम हाउस भी उनके छात्र पहुंचे थे। नागेंद्र तिवारी का जन्म जमशेदपुर में ही हुआ है चार भाई, माता-पिता और बहन के साथ गरीबी में पले बढ़े नरेंद्र ने कई बच्चों को पढ़ाकर अफसर बना दिया। जेल चौक मेंपानी टंकी के पास एक रूम में वे वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे और खुद भी पढ़ा करते थे। ताकि वह अपनी पढ़ाई और अपने भाई बहनों की पढ़ाई पूरी करा सकें।

Posted By: Vikas Srivastava

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