बलरामपुर में साड़ी-सिंदूर पहनकर चंडी पाठ करते हैं पुरुष भक्त, बिना पुरोहित के होती है मां दुर्गा की अनूठी आराधना
यह कहानी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर में एक अनोखी दुर्गा पूजा की है, जहाँ आयोजक पवित्र सिंह सरदार स्वप्नादेश पर नारी वेश में चंडी पाठ करते हैं।

आस्था और विश्वास की अनोखी कहानी से जुड़ी है पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर थाना क्षेत्र के गेड़गेड्डी गांव की दुर्गापूजा।
HighLights
पुरुष भक्त पवित्र सिंह साड़ी पहनकर करते हैं चंडी पाठ।
स्वप्नादेश पर आधारित, बिना पुरोहित के होती है यह पूजा।
आर्थिक सहायता के लिए सरकार से लगाई गई गुहार।
अमलेश कुमार, बलरामपुर। गहरी रात का सन्नाटा और स्वप्न में मां दुर्गा का दिव्य दर्शन! एक कथित स्वप्नादेश ने साधारण दिहाड़ी मजदूर के जीवन की दिशा बदलकर रख दी।
आस्था, विश्वास और भक्ति की यह अनोखी कहानी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर थाना क्षेत्र स्थित गेड़गेड्डी गांव से जुड़ी है।
यहां आयोजित होने वाली दुर्गापूजा में रहस्य, रोमांच और अनूठी साधना का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो दूर-दराज के लोगों के बीच कौतूहल और आकर्षण का विषय बना हुआ है।
साधना का अद्भुत रूप: नारी वेश में करते हैं चंडी पाठ
‘शंकर सिंह भूमिज सार्वजनिन दुर्गापूजा समिति’ के मुख्य आयोजक पवित्र सिंह सरदार के अनुसार, लगभग तीन वर्ष पहले उन्हें स्वप्नादेश मिला था।
इसके बाद उन्होंने एक छोटे से घट में गुप्त रूप से मां दुर्गा की आराधना शुरू की। बाद में पुनः स्वप्नादेश मिलने पर ग्रामीणों और दोस्तों के सहयोग से पिछले वर्ष भव्य प्रतिमा स्थापित कर सार्वजनिक रूप से पूजा का शुभारंभ किया गया।
इस वर्ष यह पूजा अपने दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इस पूजा की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता आयोजक पवित्र सिंह सरदार की विशिष्ट साधना है।
देवी के निर्देशानुसार वे महापंचमी से विजयादशमी तक पारंपरिक नारी रूप धारण करते हैं। वे लाल पाड़ की साड़ी पहनते हैं, माथे पर सिंदूर, पैरों में आलता और आभूषण सजाकर पूरी तरह स्त्री वेश में रहते हैं।
इस आयोजन में किसी ब्राह्मण पुरोहित को नहीं बुलाया जाता, बल्कि पवित्र स्वयं ही चंडी मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करते हुए समस्त विधि-विधान से पूजा संपन्न कराते हैं।
आर्थिक संकट बनी बड़ी चुनौती
गेड़गेड्डी गांव की इस पूजा में स्थानीय ग्रामीणों का भरपूर सहयोग और अपार श्रद्धा देखने को मिलती है। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण इस बार भी भव्य पंडाल और आकर्षक विद्युत सज्जा का निर्माण नहीं हो पाया है।
आयोजक पवित्र सिंह सरदार ने स्थानीय विधायक और राज्य सरकार से आर्थिक सहायता प्रदान करने की गुहार लगाई है। उनका मानना है कि यदि सरकारी अनुदान या सहायता मिलती है, तो परंपरा को और भव्य तथा सुव्यवस्थित रूप दिया जा सकेगा।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि मां का यह दिव्य और अनूठा आयोजन भविष्य में और अधिक भव्य स्वरूप प्राप्त करेगा।
