जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : 'बाल यौन शोषण अब बस, आओ अब बात करें' अभियान के तहत बच्चों को यौन शोषण से बचाने के मकसद से दैनिक जागरण ने परवरिश फाउंडेशन के सहयोग से बुधवार को सेंट मेरीज ¨हदी स्कूल बिष्टुपर में एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें गुड टच और बैड टच के बारे में बच्चों और उनके अभिभावकों को बताया गया।

बच्चों को गुड टच-बैड टच के बारे में जानकारी देने के लिए परवरिश की दीप्ति मिरानी ने बाल यौन शोषण, सेक्सुअल एब्यूज रोचक तरीके से जानकारी दी। दीप्ति ने बताया कि सरकारी आंकड़े के मुताबिक लड़कियों से अधिक बाल यौन शोषण के शिकार लड़के हो रहे हैं। इस मामले में लड़कियों का प्रतिशत जहां 47 है, वहीं लड़कों का 53। इसे कम करने के लिए समाज को अपनी धारणा बदलनी होगी। बच्चों की सुरक्षा के लिए हमें आगे आना होगा।

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अजनबी तंग करे तो तुरंत करें विरोध

दीप्ति मिरानी ने बच्चों को समझाया कि जब आपको कोई अजनबी या करीबी व्यक्ति बुरी नीयत से हाथ लगाए, आपको अश्लील वीडियो दिखाए या मर्जी के खिलाफ आपको तंग करे तो तुरंत आपको उसका विरोध करना चाहिए। ताकि उस व्यक्ति को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया जा सके। बच्चों से कहा कि आपके साथ कोई अजनबी व्यक्ति बुरी हरकत करे तो तुरंत शोर मचाना चाहिए और भाग कर अपने अभिभावकों को बताना चाहिए।

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बच्चों को दिखाई गई वीडियो

दीप्ति ने बच्चों से कहा कि कोई तंग करे तो आपको मदद मांगनी चाहिए। तुरंत अपने माता-पिता के मोबाइल नंबर पर संपर्क कर मौके पर बुलाना चाहिए ताकि होने वाले नुक्सान से बचा जा सके। उन्होंने बच्चों को एक नॉलेज वीडियो भी दिखाई। इससे पूर्व दैनिक जागरण जमशेदपुर के सहायक महाप्रबंधक दिलावर साहू, दीप्ति मिरानी एवं सेंट मेरीज स्कूल की प्राचार्य सिस्टर प्रेमलता ने कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।

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अनदेखी न करें अभिभावक

दीप्ति ने बच्चों को बाल यौन शोषण संबंधी जानकारी देने के बाद दूसरे सत्र में अभिभावकों को भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अभिभावकों सचेत और सतर्क किया। उन्होंने कहा कि बाल यौन शोषण गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसकी अनदेखी करना उचित नहीं है और अब समय आ गया है कि अभिभावक इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार से बच्चों के साथ होने वाले बाल यौन शोषण के विषय पर बच्चों को जागरूक किया जाना चाहिए। ताकि उनकी चुप्पी टूटे और समाज से बाल यौन शोषण जैसे गंभीर अपराध को रोका जा सके। यदि ऐसा किया गया तो निश्चित तौर पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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बच्चे इनका रखें ख्याल

-आपके निजी अंग को किसी को न छूने दें

-किसी भी अनजान व्यक्ति से गिफ्ट न लें

-किसी को भी जबरदस्ती कपड़े उतारने न दें

-गलत पिक्चर को न देखें और दिखाने वाले से दूर रहें

-गंदी चीजें लिखने का प्रतिवाद करें

-बिना इजाजत के तस्वीर किसी को न लेने दें।

-किसी अजनबी की भी गोद में न बैठें

-बाथरूम में नहाने के वक्त अपनी मां को छोड़ का किसी को अंदर न घुसने दें।

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क्या होता है बैड टच

एक्सपर्ट दीप्ति ने बच्चों को बताया कि जब कोई व्यक्ति आपकी मर्जी के बिना बुरी नीयत से आपके निजी अंग को टच करता है तो यही बैड टच कहलाता है। उन्होंने कहा कि बैड टच लड़के और लड़किया दोनों के साथ होता है। जरूरी नहीं है ऐसा करने वाला कोई अजनबी ही हो, यह कोई भी कर सकता है। जब कोई विकृत मानसिकता का व्यक्ति किसी बच्चे के प्राइवेट पा‌र्ट्स को टच करता है। किसी बच्चे को अपने प्राइवेट पार्ट को टच कराने को कहता है। बच्चे को गंदी वीडियो या फोटो दिखाना और गंदे मैसेज भेजना सेक्सुअल एब्यूज की श्रेणी में आता है।

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गुस्से में चीखते हुए विरोध करें

एक्सपर्ट दीप्ति मिरानी ने बच्चों को बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति उनके साथ सेक्सुअल एब्यूज या बैड टच जैसी हरकत करे तो घबराए नहीं, उसका तुरंत विरोध करें। बिल्कुल भी डरें न गुस्से में चीखते हुए उसे मना करें और उस स्थान से बाहर निकलें।

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अभिभावकों की प्रतिक्रिया

-छोटे बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अब बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में बताएं।

- पद्मिनी

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अगर कोई बच्चा सेक्सुअल एब्यूज का शिकार होता है तो हमें चाहिए कि हम उसकी काउंसिलिंग करें। काउंसिलिंग के लिए चाइल्डलाइन जैसी संस्थाएं उपलब्ध हैं।

-मधु

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-दैनिक जागरण व परवरिश केयर्स फाउंडेशन द्वारा बच्चों को जागरूक करना सराहनीय है। सरकार को कानून बनाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बनाए गए कानूनों को सख्ती से लागू भी करना चाहिए। -प्यारी कोंगारी।

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-यह कार्यशाला बच्चों और अभिभावकों की झिझक तोड़ने में मददगार साबित होगा। बच्चों के सुरक्षित बचपन के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को भी मुखर होना पड़ेगा।

- जानकी

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-हम लोग बच्चों की समस्या को हल्के में ले लेते हैं, यह बाद में नासूर बन जाता है। हम जानते सब हैं और समझते भी हैं, लेकिन अफसोस की बात है हम अमल नहीं कर पाते हैं।

-रजनी देवी

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-यह एक सीख देने कार्यक्रम था। इसमें समय दिया और काफी कुछ सीखने को मिला। इसे अपने घर में उतारने का प्रयास करुंगी। उम्मीद है लोग इस विषय को गंभीरता पूर्वक लेंगे।

-सीमा महाकुड़

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-ऐसी घटना होने पर बच्चे चुपचाप नहीं बैठें, बल्कि अपने माता-पिता, टीचर और पुलिस को जरूर बताएं। अगर कोई सेक्सुअल एब्यूज या बैड टच जैसी हरकत करे तो वह उसका विरोध करें।

-प्रतिमा देवी।

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-अभिभावक ही बच्चों को सही ढंग से गाइड कर पाएंगे। एक्सपर्ट ने काफी अच्छे तरीके से बच्चों को समझाया। इसके लिए दैनिक जागरण को धन्यवाद।

-मंजू आदया

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- इस तरह की कार्यशाला में आकर अच्छा लगा। काफी कुछ सीखने को मिला। ऐसे कार्यक्रम से लोगों की धारणा बदलती है।

- प्रियंका सिंह।

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-यह आज के जमाने का विषय है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह लगातार बढ़ता जा रहा है। दैनिक जागरण ने इस विषय की गंभीरता से समझा है।

- अनीषा।

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-बाल यौन शोषण काफी बड़ा मुद्दा है । शिक्षक और अभिवावकों को इस विषय में बच्चो को जानकारी देनी चाहिए, ताकि वे सावधान और सतर्क रह सकें।

- विशाल सिंह

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-पहली बार एक अभिभावक के रूप में इस तरह की कार्यशाला में भाग लिया और कई तरह की झिझक को तोड़ा। इस कार्यशाला से अभिभावकों में जागरुकता आयेगी।

-चाणक्य।

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-कार्यक्रम में आकर बहुत अच्छा लगा। सबके लिए सुरक्षा जरूरी है। चाहे वह लड़का या लड़की। इस कार्यक्रम से हमें काफी कुछ सीखने का मौका मिला।

-गणेश सिंह, कदमा।

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-यह काफी संवेदनशील मुद्दा था, इसे दैनिक जागरण ने उठाकर बच्चों और अभिभावकों की आंखे खोली। यह बहुत जरूरी था।

- सतनाम सिंह

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-उम्मीद करते हैं अभिभावकों में जागरुकता आई होगी। यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम अपने बच्चों की खामोशी को समझे और इसका कारण पूछें। - आरपी सिंह।

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-इस कार्यशाला से कई तरह की जानकारी प्राप्त हुई। हमारी आंखें खुल गई। बच्चों को हम इसे लेकर सचेत करेंगे और हम भी सचेत रहेंगे।

-शंकर प्रसाद।

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-दैनिक जागरण ने शानदार तरीके से इस कार्यशाला का आयोजन कराकर अभिभावकों और बच्चों को महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई। यह काफी आवश्यक था।

-रीमू।

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-यह कार्यशाला हमारे आगे के जीवन में मददगार साबित होगी। इस मुद्दे पर लोगों को जागरुक होना ही पड़ेगा। लड़का व लड़की को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

- दिलीप प्रधान

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-कार्यशाला की महत्वपूर्ण जानकारियों को हम अपने जीवन में उतारेंगे। अपने बच्चों और पड़ोसियों को भी जागरुक करेंगे।

-रंजीत प्रधान।

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-हम अपनी जिम्मेदारियों को समझें, वरना आगे और भी भयानक परिस्थिति पैदा होगी। बाल यौन शोषण आज का ज्वलंत मुद्दा है।

- विवेकानंद।

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बच्चों के बोल

-बहुत कुछ सीखने और जानने का मौका मिला। बच्चों के हित के बारे में काफी कुछ बताया गया। कई बाते हमें पता नहीं थी।

-गुंजन कुमार पासवान

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-इस कार्यशाला के बाद बच्चों को यह समझ आ जाएगा कि कौन हमें किस नीयत से टच कर रहा है। बैड टच लगेगा तो बच्चे आवाज उठाएंगे।

-इशांत कुमार।

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-कार्यशाला ने हमारी आंखे खोल दी। प्रश्नों का उत्तर देकर झिझक टूटा और बाल यौन शोषण को लेकर हम जागरुक हुए।

- अपूर्वा पाल

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-हमारे लिए यह बिल्कुल नई तरह की कार्यशाला थी, जिसके बारे में हम जानते ही नहीं थे। हम कई बार साथियों को कुछ करने से रोकते है।

- सत्य मिश्रा।

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-दैनिक जागरण ने हमारी आंखें खोल दी। यह बच्चों के लिए काफी लाभप्रद था। इस तरह का सेशन हर स्कूल में होना चाहिए।

- गोपी।

Posted By: Jagran