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व्यवस्था की लाचारी: बहरागोड़ा में सरकारी जमीन नहीं मिली तो सेविका ने अपने घर को ही बना दिया आंगनबाड़ी

Published: Wed, 27 May 2026 05:57 PM (IST)

पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा में 23 साल से एक आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी भवन के अभाव में सेविका के निजी घर ...और पढ़ें

बहरागोड़ा प्रखंड के कुलियाक गांव में एक घर में संचालित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र।

बहरागोड़ा प्रखंड के कुलियाक गांव में एक घर में संचालित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र।

HighLights

  1. सेविका सपना जेना 22 बच्चों को अपने घर से संभाल रही हैं।

  2. ग्रामीणों ने सरकारी भवन निर्माण की तत्काल मांग की।

संसू, बहरागोड़ा। डिजिटल इंडिया और नौनिहालों के बेहतर भविष्य के तमाम दावों के बीच पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड से विकास की पोल खोलती एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां की पाथरी पंचायत अंतर्गत कुलियाक गांव में वर्ष 2003 से संचालित आंगनबाड़ी केंद्र आज भी सरकारी भवन के अभाव में एक निजी झोपड़ीनुमा घर में चलने को मजबूर है। 
 
विडंबना देखिए कि 23 वर्षों का एक लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस केंद्र को अपनी जमीन और छत नसीब नहीं हो सकी है। सरकारी कागजों में जमीन उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर भवन निर्माण की प्रक्रिया को अधूरी फाइल में दबाकर छोड़ दिया गया है। 
 

सेविका के घर में सिमटा 22 बच्चों का भविष्य  

सरकारी उदासीनता के बीच इस केंद्र को जिंदा रखने का काम यहां की सेविका सपना जेना कर रही हैं। वे अपने ही निजी घर में बच्चों को पढ़ाने, पोषाहार तैयार करने और स्वास्थ्य-टीकाकरण जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। 
 
वर्तमान में इस केंद्र में कुलियाक और पड़ोसी गांव गोहालडीही के 22 मासूम बच्चे नामांकित हैं। सीमित संसाधनों और जगह की भारी कमी के बावजूद यह केंद्र नियमित रूप से संचालित हो रहा है। 
 

खराब चापाकल ने बढ़ाया पेयजल संकट  

भवन के अभाव से जूझ रहे इस केंद्र पर बुनियादी सुविधाओं का भी अकाल है। केंद्र परिसर (निजी घर) में लगा सरकारी चापाकल कई दिनों से खराब पड़ा है। 
 
ऐसे में सेविका स्वयं दूर-दराज के स्रोतों से पानी ढोकर लाती हैं, तब जाकर बच्चों को पीने का पानी नसीब होता है। वहीं, तपती गर्मी में बच्चों को राहत देने के लिए सेविका ने अपने निजी घर के कनेक्शन से बिजली जोड़कर किसी तरह पंखे की व्यवस्था की है। 
 

ग्रामसभा के प्रस्ताव भी पड़े हैं बेअसर  

सेविका सपना जेना ने बताया कि जून 2003 से वे निस्वार्थ भाव से इस केंद्र को संभाल रही हैं। बच्चों के लिए हर दिन घर में ही भोजन तैयार होता है। 
 
उन्होंने कई बार ग्रामसभा के माध्यम से भवन निर्माण का प्रस्ताव भिजवाया है। स्थानीय मुखिया से लेकर प्रखंड की सुपरवाइजर (पर्यवेक्षक) तक को लिखित आवेदन सौंपकर गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। 
 

सेवा भावना की मिसाल, ग्रामीणों ने उठाई मांग  

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर सेविका सपना जेना की सेवा भावना और समर्पण न होता, तो यह केंद्र कब का बंद हो चुका होता। वे बच्चों को अपने परिवार की तरह मानकर पाल रही हैं, जिससे बच्चे खुशी-खुशी केंद्र आते हैं। 
 
ग्रामीणों ने अब सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि कुलियाक गांव में अविलंब सरकारी जमीन चिन्हित की जाए और आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि नौनिहालों को बेहतर माहौल में शिक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार मिल सके।