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ईचागढ़ के बांका महादेव: जहां कई प्रयासों के बाद भी सीधा नहीं हो सका शिवलिंग, जानिए मंदिर की पौराणिक रहस्य

Published: Sun, 23 Aug 2026 08:00 AM (IST)

ईचागढ़ के लेपाटांड़ गांव में स्थित बांका महादेव मंदिर का शिवलिंग अपनी झुकी हुई अवस्था के लिए प्रसिद्ध है, जिसे ...और पढ़ें

पाटांड़ गांव में स्थित बांका महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है।

पाटांड़ गांव में स्थित बांका महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है।

HighLights

  1. ईचागढ़ के बांका महादेव मंदिर का शिवलिंग अपनी झुकी अवस्था के लिए प्रसिद्ध।

  2. सीधा करने के सभी प्रयास, पौराणिक कथाओं के अनुसार, विफल रहे।

  3. श्रावण मास में भक्तों की भीड़ उमड़ती, मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता।

अरूण कुमार माझी, ईचागढ़। सरायकेला-खरसावां जिले का ईचागढ़ प्रखंड धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं से समृद्ध रहा है। यहां के लेपाटांड़ गांव में स्थित बांका महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। 
 
मंदिर में स्थापित शिवलिंग अपनी विशिष्ट झुकी या तिरछी (बांका) अवस्था के कारण पूरे क्षेत्र में कौतूहल और भक्ति का विषय बना हुआ है।
 
ग्रामीणों के अनुसार, इस शिवलिंग को सीधा करने के कई ऐतिहासिक प्रयास किए गए, लेकिन हर बार यह स्वतः अपनी पुरानी अवस्था में लौट आया। इसी अद्भुत विशेषता के कारण इन्हें बांका महादेव कहा जाता है।
 

सीमेंट से बांधने का प्रयास भी रहा नाकाम 

मंदिर के पुजारी एवं स्थानीय ग्रामीण पशुपति बागची बताते हैं कि लगभग 25 से 30 वर्ष पूर्व ग्रामीणों के सहयोग से बांका महादेव के लिए पक्के मंदिर का निर्माण कराया गया था। 
 
निर्माण कार्य के दौरान शिवलिंग को सीधा करके सीमेंट और कंक्रीट से बेहद मजबूती के साथ स्थापित किया गया। हालांकि, कुछ ही समय बाद शिवलिंग पुनः अपनी पुरानी झुकी हुई अवस्था में आ गया। 
 

राजा विक्रमादित्य और जमींदार से जुड़ी पौराणिक गाथाएं 

स्थानीय लोग इसे भगवान भोलेनाथ की अलौकिक लीला और उनकी अपनी इच्छा मानते हैं। बांका महादेव को लेकर क्षेत्र में कई पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। 

जनश्रुतियों के अनुसार, राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में भी शिवलिंग को सीधा करने का प्रयास किया गया था, जो असफल रहा।
 
इसके अलावा, करीब एक शताब्दी पूर्व एक स्थानीय जमींदार ने शिवलिंग को बैलगाड़ी पर लादकर किसी अन्य स्थान पर ले जाने की कोशिश की थी।
 
परंतु काफी प्रयास के बावजूद बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी। जब शिवलिंग को वहीं उतार दिया गया, तो अगली ही सुबह वह पुनः अपने मूल स्थान पर पाया गया। इस घटना के बाद से ग्रामीणों की आस्था और भी दृढ़ हो गई।
 

श्रावण मास में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

पवित्र श्रावण मास के दौरान बांका महादेव मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल रहता है। आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। 
 
स्थानीय लोगों की दृढ मान्यता है कि बांका महादेव के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
 
अपनी अनूठी मान्यताओं के कारण लेपाटांड़ का यह मंदिर ईचागढ़ क्षेत्र के प्रमुख आस्था स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।