जमीन का नेचर बदलकर हो रही रजिस्ट्री: पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कपाली-डोभो अतिक्रमण पर सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड सरकार पर भू-माफिया, अवैध निर्माण और आदिवासी भूमि अतिक्रमण को लेकर तीखा हमला बोला है।

सोमवार को सर्किट हाउस एरिया स्थित निर्मल गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा।
HighLights
कपाली-डोभो में कृषि भूमि पर अतिक्रमण की पारदर्शी जांच की मांग।
स्वर्णरेखा-खरकई नदियों व एलिफेंट कॉरिडोर में अवैध निर्माण पर चिंता जताई।
जासं, जमशेदपुर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने राज्य में बढ़ते भू-माफिया, अवैध निर्माण, आदिवासी भूमि पर अतिक्रमण और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
सोमवार को सर्किट हाउस एरिया स्थित निर्मल गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया के आगे आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार और नदियों का प्राकृतिक अस्तित्व दोनों गंभीर खतरे में हैं।
कपाली-डोभो में खेती की जमीन पर अतिक्रमण
अर्जुन मुंडा ने कपाली और डोभो क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा कि जिन इलाकों में कभी बहुसंख्यक आदिवासी परिवार खेती की जमीन पर निर्भर थे, वहां उन्हें सुनियोजित तरीके से बेदखल कर गगनचुंबी इमारतें खड़ी की जा रही हैं।
उन्होंने मांग की कि सरकार कपाली और डोभो में खेती की जमीन पर हो रहे निर्माण कार्यों की पारदर्शी जांच कराए और इस पूरे विषय पर आधिकारिक श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे।
स्वर्णरेखा-खरकई नदी और एलिफेंट कॉरिडोर में अवैध निर्माण
मुंडा ने आरोप लगाया कि इस खेल में पुलिस-प्रशासन से लेकर सत्ता के शीर्ष स्तर तक की मिलीभगत की जांच होना बेहद जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के तटबंधों पर हो रहे बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों पर गहरी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र और बाढ़ नियंत्रण नियमों को ताक पर रखकर इमारतें बनाई जा रही हैं, जिससे भविष्य में भयानक पर्यावरणीय व बाढ़ का संकट पैदा होगा।
इसके अलावा, उन्होंने दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी से सटे एलिफेंट कॉरिडोर का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि हाथियों के प्राकृतिक आवागमन वाले रास्तों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति आखिर किसने और किस आधार पर दी?
कृषि भूमि का स्वरूप बदलकर रजिस्ट्री कराने का आरोप
मुंडा ने आरोप लगाया कि निबंधन कार्यालयों में अधिक शुल्क लेकर कृषि भूमि का मूल स्वरूप (Nature) बदला जा रहा है और उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए पंजीकृत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह नियम-विरुद्ध जमीन का निबंधन करने में शामिल अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर तत्काल ध्वस्त किया जाना चाहिए।
टाटा स्टील के कुछ अधिकारियों और कानून-व्यवस्था पर सवाल
पूर्व सीएम ने टाटा स्टील के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लीज एरिया के बाहर शिड्यूल एरिया में जमीन माफिया के साथ मिलकर गलत काम करने की शिकायतें मिल रही हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए।
शहर की कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जमशेदपुर में जमीन की दलाली के कारण अपराध चरम पर है। दिनदहाड़े गोलमुरी बैंक डकैती, फायरिंग और हत्या जैसी वारदातें पुलिस के सूचना तंत्र की विफलता को दर्शाती हैं।
उन्होंने संदेह जताया कि अपराधियों को अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिल रहा है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।
