जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : मधुमेह रोगियों को सावधान होने की जरूरत है। अब उनमें फ्रोजन शोल्डर की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो चिंता का विषय है। उक्त बातें जीवन ज्योति फिजियोथेरेपी सेंटर के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. गौतम भारती ने कहीं। वह दैनिक जागरण के लोकप्रिय कार्यक्रम प्रश्न-प्रहर में उपस्थित होकर लोगों को उनके सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने लोगों द्वारा पूछें गए तमाम सवालों का जवाब दिया।

डॉ. गौतम भारती ने कहा कि फ्रोजन शोल्डर में कंधे में दर्द और कंधे की अकड़न हो जाती है। इससे कंधे का हिलना मुश्किल हो जाता है। फ्रोजन शोल्डर के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं एवं समय के साथ बिगड़ते जाते हैं। इस दौरान कंधे का दर्द इतना तेज हो जाता है कि मरीज पाकेट से पर्स या बटुआ भी नहीं निकाल पाता है। बालों में कंघी करना, ड्राइविंग करना, कपड़े उतारना भी मुश्किल हो जाता है। चूंकि मरीज के हाथ में दर्द के साथ-साथ अकड़ जाता है। कुछ लोग करवट भी नहीं बदल पाते हैं। डॉ. गौतम भारती ने कहा कि लगभग लगभग 20 प्रतिशत मधुमेह रोगियों में फ्रोजन शोल्डर की समस्याएं देखी जा रही है।

महिलाओं में अधिक होती है समस्या

डॉ. गौतम भारती ने कहा कि फ्रोजन शोल्डर की समस्याएं महिलाओं में अधिक देखी जा रही है। उम्र 40-70 के बीच यह परेशानी अधिक होती है लेकिन अब युवाओं में भी फ्रोजन शोल्डर की समस्या देखी जा रही है, जो चिंता का विषय है। मधुमेह रोगियों में पांच गुना अधिक फ्रोजन शोल्डर की समस्या होती है। इसके साथ ही अति सक्रिय थायराइड, अंडर एक्टिव थायराइड, हृदय रोग, टीबी व पार्किंसंस रोगियों में फ्रोजन शोल्डर की समस्या होती है।

कंधा काम करना बंद कर देता है

फ्रोजन शोल्डर के दौरान कंधे का कैप्सूल सुजकर मोटा हो जाता है। कंधे की चोट, शरीर की किसी हिस्से की सर्जरी, न्यूरोलॉजिकल परेशानी के कारण कंधा सामान्य रूप से कार्य करना बंद कर देता है। तीन चरणों में यह बीमारी होती है। सबसे पहले चरण में कंधे में दर्द और जकड़न होते हैं, जो रात को बढ़ जाते हैं। छह सप्ताह से नौ माह तक यह स्थिति रह सकती है और दर्द बढ़ सकता है। फिर अगले चरण में दर्द तो घट जाता है लेकिन अकड़न बनी रहती है। कंधा कम ही चल पाता है। यह स्थिति दो से छह माह तक रहा करती है। अंतिम चरण में दर्द काफी घट चुका होता है एवं कंधा बेहतर चलने लगता है।

शुरुआती दौर में कराएं इलाज

फ्रोजन शोल्डर के लक्षण सामने आते ही इलाज शुरू कर देना चाहिए। कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है। इसके बाद एक्सरे व एमआरआई कराने पड़ते हैं। ऐसे में इस बीमारी का लक्षण सामने आते ही इलाज शुरू कर देना चाहिए। इस बीमारी में दर्द की दवा नहीं खाने चाहिए। फिजियोथेरेपी के माध्यम से इसका इलाज संभव है। विभिन्न फिजियोथेरेपी तकनीकों जैसे हॉट पैक, अल्ट्रासाउंड थेरेपी, आइएफटी आदि के द्वारा इसका इलाज किया जाता है।

बरते सावधानी-

कंधे के दर्द को नजरअंदाज नहीं करें। खासकर जो पूर्व से मधुमेह रोगी हैं।

- दर्द ज्यादा हो तो हाथों को सिर के बराबर ऊंचाई पर रख कर सोएं। इससे राहत मिलती है।

- फिजियोथेरेपिस्ट के निर्देशानुसार कंधे का व्यायाम नियमित रूप से लंबे समय तक करना चाहिए।

-इन लोगों ने पूछें सवालसवाल :

मैं शुगर के रोगी हूं। बायां हाथ पूरी तरह से नहीं उठ पाता है।

रामेश्वर सिंह, टेल्को।

जवाब : शुगर मरीजों में नर्व परेशानी होती है। दर्द को कम करने के लिए ज्यादा दवा नहीं खाएं। इलेक्ट्रो थेरेपी से यह ठीक हो जाता है।

सवाल : कमर व जांघ में दर्द रहता है।

शीला देवी, हरहरगुट्टू।

जवाब : कमर के नस दब जाने के कारण इस तरह की परेशानी होती है। इसमें भुंजगासन सहित कई आसन किए जाते हैं।

सवाल : ठंड में पैर व घुटने का दर्द बढ़ जाता है।

मो. रफीक, मानगो।

जवाब : ठंड से बचें। घुटना के लिए कुछ व्यायाम होते हैं, जिसे करने के बाद राहत मिलती है।

सवाल : शरीर ठीक है लेकिन घुटना में दर्द रहता है।

मुनीलाल महराज, बर्मामइंस।

जवाब : यह ऑस्टियोआर्थराइटिस हो सकता है। एक बार जांच कराएं।

सवाल : मधुमेह रोगी हूं। हाथ में उठ नहीं पाता।

निर्दोष टोप्पो, परसुडीह

जवाब : इसे फ्रोजन शोल्डर कहते हैं। फिजियोथेरेपी लेने से यह ठीक हो जाता है।

सवाल : हमेशा ज्वाइंट पेन रहता है।

श्वेता प्रसाद, गोलपहाड़ी।

जवाब : आप भुंजगासन व शलभासन करें। इससे फायदा मिलेगा। इसके साथ ही, मानगो से मो. शेख, कदमा से साधना चक्रवर्ती, पपाई चक्रवर्ती, सोनारी से रमेश सिंह, जुगसलाई से मोहन लाल सहित अन्य लोगों ने पूछें सवाल।

Edited By: Rakesh Ranjan