जमशेदपुर (वेंकटेश्वर राव)। पूर्वी सिंहभूम जिला के धालभूमगढ़ प्रखंड के मोहुलीशोल गांव के रहनेवाले होनहार विद्यार्थी जीत साव को जेईई एडवांस में ओबीसी केटगरी में 912वां रैंक मिला है। उसे अखिल भारतीय स्तर पर 5193वां स्थान प्राप्त हुआ है।जीत के अनुसार उसे भी अन्य बच्चों की तरह अच्छे स्कूल में पढ़ने का भूत सवार था, लेकिन माता-पिता की स्थिति और घर की आर्थिक हालत को देखते हुए उन्होंने गांव के ही सरकारी हाई स्कूल में पढ़ने का निर्णय लिया। इस कदम में सभी का साथ मिला। मोहुलीशोल उच्च विद्यालय में नामांकन भी लिया।

वर्ष 2019 में मैट्रिक का टॉपर रहा। इस छात्र को आगे कुछ करने का जोश था। उन्हें मालूम था कि उनके परिजन महंगी शिक्षा नहीं दे पाएंगे। वे हर दिन पेट की भूख मिटाने की जद्दोजहद करते हैं। ऐसे में जीत ने सरकारी योजनाओं को ही अपने उच्च शिक्षा का माध्यम बनाया। इसके लिए उन्होंने प्रयास किया तथा झारखंड सरकार की आकांक्षा प्रवेश परीक्षा में शामिल हुआ और इसमें वह उत्तीर्ण हो गया। इसके बाद इस आकांक्षा योजना के माध्यम से जीत को कोविड के कारण दो साल ऑनलाइन कोचिंग निश्शुल्क प्रदान किया गया। छात्र ने भी मन लगाकर पढ़ा और जेईई एडवांस में सफलता प्राप्त की। इस छात्र की सफलता पर मोहुलीशोल हाई स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भूतेश पंडित, एनएचएआइ अधिकारी पूर्ण चंद्र काहिली ने छात्र को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

लोन लेकर आइआइटीस में करेगा अध्ययन

जीत साव के अनुसार वर्तमान में जोसा की ओर से काउंसिलिंग चल रही है। आइआइटी खड़गपुर, दिल्ली और कानपुर की काउंसिलिंग में वे शामिल हो चुके हैं। वे मेकेनिकल या इलेक्ट्रिकल ब्रांच लेकर आगे पढ़ना चाहते हैं। वे इंजीनियर बनकर अपने माता-पिता को वे सारी खुशियां देना चाहते हैं, जिसके लिए वे तरसते रहे। जीत ने कहा कि माता-पिता ने जिस मेहनत से उन्हें पढ़ाया है, इसका वे बखान नहीं कर सकते हैं। परिणाम आने के बाद वे बैंकों से एजुकेशन लोन के लिए आवेदन करेंगे। लोन लेकर चयनित आइआइटी में अपनी पढ़ाई को जारी रखेंगे।

क्या है आकांक्षा योजना

यह योजना झारखंड सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इस योजना में चयन के लिए जैक परीक्षा लेता है। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले गरीब व मेधावी छात्रों को रांची में इंजीनियरिंग व मेडिकल का कोचिंग कराया जाता है। साथ ही 12वीं की परीक्षा की तैयारी भी करवाई जाती है। दोनों काम एक साथ चलता है। यह बिल्कुल निश्शुल्क होता है। रांची में खाने एवं रहना निश्शुल्क है। पहले इस योजना का कोचिंग जिला स्तर पर होता था, लेकिन अब इसे राजधानी में ही केंद्रित कर दिया गया है। इस योजना से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों को इंजीनियरिंग व मेडिकल संस्थानों में दाखिला मिल रहा है।

Edited By: Rakesh Ranjan