आदित्यपुर(जेएनएन)।  यह कहानी इस सवाल को मौजू बनाती है कि मुझे अबला क्यों कहते हैं जनाब। पूर्वी सिंहभूम के जिला मुख्यालय जमशेदपुर से सटे सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर की महिला ने मिसाल पेश की है। पति घर पर नहीं थे। प्रसव पीड़ा के बाद पड़ोसियों से मदद के लिए गुहार लगाई, पर किसी ने अस्पताल नहीं पहुंचाया। आशा तियू 14 वर्षीय बेटी को साइकिल पर बैठा कर खुद अस्पताल की ओर चल पड़ी। पर अस्पताल पहुंचने से पहले ही पीड़ा इस कदर बढ़ी कि रोड किनारे ही उसे बच्चे को जन्म देना पड़ा।

आसंगी की रहनेवाली है आशा

घटना बुधवार रात 11 बजे की है। आशा तियू आदित्यपुर नगर निगम के आरटीआइ थाना क्षेत्र के आसंगी बस्ती की रहने वाली है। पति सुमराई तियू वाहन चालक हैं। वह घर पर नहीं थे। आशा अपनी बेटी के साथ घर में अकेली थी। प्रसव पीड़ा के पश्चात जब आसपास के लोगों ने अस्पताल नहीं पहुंचाया तो साइकिल से खुद आदित्यपुर स्वास्थ्य केंद्र की ओर चल पड़ी। हिम्मत की बात यह कि उसने साइकिल पर बेटी पूजा तियू को भी बैठा रखा था। वह घर से जैसे ही साढ़े तीन किलोमीटर दूर पहुंची तो पीड़ा बढ़ गई। मजबूर होकर अस्पताल से थोड़ी दूर पहले आदित्यपुर थाना स्थित संजय फल दुकान के पास सड़क किनारे उसने पुत्र को जन्म दिया। नवजात के रोने की आवाज सुन पहुंचे लोग

नवजात के रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी वहां पहुंच गए। इसी बीच वहां तृणमूल कांग्रेस जिला अध्यक्ष बाबू तांती और उनके साथ कुछ लोग भी पहुंचे। महिला की स्थिति देखकर एंबुलेंस और चिकित्सीय मदद के लिए आदित्यपुर स्वास्थ्य केंद्र गए। वहां दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई बाहर नहीं निकला। इसके बाद 108 नंबर डायल किया, पर किसी ने फोन नहीं उठाया। फिर वहां से आदित्यपुर थाना पहुंच कर मामले की जानकारी दी। पुलिस ने फोन कर आधे घंटे बाद एक एंबुलेंस बुलाई। इसके बाद महिला को आदित्यपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में है भर्ती, जच्चा-बच्चा स्वस्थ

उधर, हेल्थ एजुकेटर लव कुमार ने कहा कि कुछ लोग रात 11 बजे अस्पताल में आकर हंगामा करने लगे। चूंकि नियम है कि एंबुलेंस बुलाने के लिए रांची कंट्रोल में फोन किया जाता है। उसके बाद यह सेवा मुहैया कराई जाती है। अस्पताल ने पूरा प्रयास किया। खैर, महिला अस्पताल में भर्ती है। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

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