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जमशेदपुर, जासं। शिक्षा विभाग द्वारा कराए गए ऑडिट के क्रम में यह बात सामने आई है कि लोग जबरन अपनी बच्चियों का नाम सरकारी स्कूल से कटवाकर ड्रॉप आउट दिखाते हैं, फिर वे कस्तूरबा स्कूल में नामांकन करा रहे हैं। इसके पीछे परिजन ये मानते हैं कि आवासीय विद्यालय में नामांकन के बाद उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई।

मजबूरन विभाग को कस्तूरबा के पूरे पैटर्न को बदलने का निर्णय लिया गया है। अगले साल से प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही नामांकन होगी। सिर्फ यहीं नहीं कस्तूरबा में प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन भी भरना होगा। इस संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों व जिला शिक्षा अधीक्षकों को निर्देश जारी किए है।

लेखापाल को दूसरी जगह किए जाएंगे समायोजित

सभी कस्तूरबा में लेखापाल की जरूरत नहीं है। एक या दो से काम चल सकता है। इस पर विचार चल रहा है। लेखापाल को हटाया नहीं जाएगा, बल्कि अन्य परियोजनाओं में उनका समायोजन किया जाएगा। विभाग के प्रधान सचिव ने स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम में है कि अप्रशिक्षित को पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है। अप्रशिक्षित शिक्षकों को मार्च 2019 तक मौका दिया गया, जो इसमें सफल नहीं हो पाएं उन्हें सेवा में रहने का अधिकार नहीं है। राज्य में 4500 अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों का मानदेय का भुगतान बीते दस मई से बंद कर दिया गया है। यदि कहीं कोई काम करवा रहा है तो यह उनकी जिम्मेदारी होगी। विभाग ने इस तरह के शिक्षकों का मानदेय बंद कर दिया है।

कस्तूरबा नामांकन की समीक्षा 19 को

पूर्वी सिंहभूम के नए डीएसई विनीत कुमार ने मंगलवार को शिक्षा विभाग के कार्यो की प्रगति के लिए नया निर्देश जारी किया है। इसे लेकर विभाग के हॉल में एक समीक्षा बैठक का आयोजन 19 अगस्त को होगा। इसमें खासकर कस्तूरबा के नामांकन के मामले की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में कस्तूरबा के वार्डेन, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा बीपीओ, बीआरपी, सीआरपी के साथ अन्य कर्मियों की बैठक आयोजित की गई है। इसमें नए डीएसई सभी सदस्यों व पदाधिकारियों से रुबरू होंगे तथा शिक्षा योजनाओं की समीक्षा प्रखंडवार करेंगे। मालूम हो कि अभी तक कस्तूरबा में नामांकन का कार्य खत्म नहीं हुआ है, जबकि सत्र चालू हुए चार माह बीत चुके हैं।

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