अमित तिवारी, जमशेदपुर : अब निमोनिया की वजह से एचआइवी संक्रमित बच्चों का जीवन बचाया जा सकेगा। एचआइवी संक्रमित बच्चों की जान निमोनिया लंबे समय से लेता रहा है जिसका समाधान ढूंढ लिया गया है। वह है हिब व न्यूमोकोकल टीकाकरण।

यह समाधान जमशेदपुर के डॉ. विकास कुमार आर्या के शोध से निकला है। शोध के निष्कर्षो के अनुसार एचआइवी से संक्रमित भारतीय बच्चों में निमोनिया की रोकथाम के लिए टीकाकरण काफी प्रभावी है। ये शोध भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (यूएसए) के सहयोग से किया गया है। मूलरूप से देवघर के रहने वाले डॉ. विकास कुमार आर्या ने आइआइटी खड़गपुर के मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी की प्रोफेसर संगीता दास भंट्टाचार्या के पर्यवेक्षण में इसे पूरा किया है। अध्ययन की शुरुआत पश्चिम बंगाल के पश्चिम और पूर्वी मिदनापुर जिलों में स्थापित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के साथ मिलकर 2012 में शुरू की गई थी। जो नतीजे निकले वे चौंकानेवाले रहे। शोध के निष्कर्षो को विश्व प्रसिद्ध यूरोपियन सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक इन्फेक्शस डिसीसेस की आधिकारिक 'द पीडियाट्रिक इन्फेक्शस डिजीज जर्नल के मई 2018' अंक में प्रकाशित किया गया है।

हालिया शोध में दिखाया गया है कि एचआइवी संक्रमित बच्चों से आम असंक्रमित बच्चों की तुलना में निमोनिया का जोखिम लगभग 20 से 40 गुणा ज्यादा रहता है जो उनकी मृत्यु का यह प्रमुख कारण माना जाता है। लगभग 80 फीसद निमोनिया के मामले तब होते हैं जब एचआइवी संक्रमण के परिणामस्वरूप प्रतिरोधी सीडी फोर रक्त कोशिका का स्तर 400 प्रति एमएल से नीचे आ जाता है।

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दुनिया के एचआइवी महामारी वाले देशों में भारत भी

एचआइवी संक्रमित 2.1 मिलियन लोगों के साथ, भारत दुनिया का एचआइवी महामारी से ग्रसित देशों एक है। भारत में एचआइवी ग्रसित गर्भवती महिलाओं की भी बड़ी तादाद है। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के हर 25 एचआइवी ग्रसित बच्चों में एक भारत का है। भारत में खासतौर से सभी एचआइवी संक्रमित बच्चों के लिए सरकारी सहायता के तहत निमोकोकल और हिब टीका उपलब्ध नहीं है।

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एचआइवी संक्रमित बच्चों के लिए निमोनिया का टीका जरूरी

डॉ. विकास आर्या ने बताया कि सभी उम्र के एचआइवी संक्रमित बच्चों में निमोनिया की रोकथाम के लिए हिब और न्यूमोकोकल टीके बहुत आवश्यक हैं। इन बच्चों में टीकों के सर्वोत्तम प्रतिरक्षा स्तर के लिए एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) को शीघ्रता से आरंभ करना महत्वपूर्ण है। ये टीका एक तरह से अनोखा है। ये टीके दोनों जीवाणुओं को बढ़ने से रोकते हैं। ये अप्रत्यक्ष रूप से अन्य व्यक्तियों को भी निमोनिया से बचाते हैं जिन्होंने पहले टीके नहीं लगवाए हैं।

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डॉ. विकास आर्या को मिल चुके कई अवार्ड

डॉ. विकास आर्या चिकित्सा शोध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य विशेषज्ञ हैं और मूल रूप से जमशेदपुर के टेल्को कालोनी निवासी हैं। एमबीबीएस के बाद उन्होंने आइआइटी खड़गपुर से चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में पीएचडी पूरी की। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित कर भारत और भारत के बाहर कई वैज्ञानिक सम्मेलनों में प्रस्तुतियां दी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई फेलोशिप जैसे फुटब्राइट डॉक्टोरल रिसर्च अवार्ड, रॉबर्ट ऑस्ट्रियन रिसर्च अवार्ड और हरगोबिंद खुराना फेलोशिप आदि मिल चुका है। वह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पब्लिक हेल्थ संस्थानों में शुमार, जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में विजिटिंग फेलो भी रहे। वर्तमान में वे अमेरिका में कार्यरत हैं।

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निमोनिया के लक्षण

- बुखार व ठंड लगना।

- खांसी।

- तेजी से सांस या सांस लेने में कठिनाई।

- छाती का दर्द।

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हिब और न्यूमोकोकल कोंजूगेट टीकों का डोज

- प्राथमिकता श्रृंखला

हिब टीकों के लिए : 6,10,14 सप्ताह की उम्र में टीकाकरण के साथ 12 से 18 महीने में बूस्टर डोज शामिल है।

- न्यूमोकोकल टीकों के लिए : 6,10,14 सप्ताह की उम्र में टीकाकरण के साथ 12 से 15 महीने में बूस्टर डोज शामिल है।

- सामान्य बच्चों में पांच साल के उम्र तक अनुशंसित है (डोज उम्र पर निर्भर करता है)।

- यह कुछ अन्य बीमारियों की आशंका को भी घटाता है जैसे कि कुछ प्रकार के मेनिनजाइटिस, कानों में संक्रमण आदि।

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कोट ::

बच्चों में निमोनिया के लिए दो जीवाणु न्यूमोकोकल और हिब उत्तरदायी होते हैं। टीकाकरण से इन दोनों जीवाणुओं की रोकथाम की जा सकती है। विश्व स्तर पर, न्यूमोकोकल और हिब के जीवाणु हर वर्ष क्रमश: लगभग 15 मिलियन और 8 मिलियन गंभीर बीमारियों के कारक होते हैं। परिणामस्वरूप पांच वर्ष से कम आयु बच्चों में 0.8 और 0.4 मिलियन मौतें होती हैं।

- डॉ. विकास कुमार आर्या, शोधकर्ता।

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By Jagran