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सावधान! गुणवत्ता जांच में फेल हुईं 330 दवाएं और कॉस्मेटिक्स, कोल्हान में औषधि विभाग का बड़ा जांच अभियान

Published: Wed, 28 Oct 2026 07:00 AM (IST)

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की रिपोर्ट के अनुसार, 330 दवाएं और कॉस्मेटिक्स गुणवत्ता जांच में फेल हो गए हैं।

औषधि विभाग ने जमशेदपुर और कोल्हान में सघन जांच अभियान शुरू किया है।

औषधि विभाग ने जमशेदपुर और कोल्हान में सघन जांच अभियान शुरू किया है।

HighLights

  1. जमशेदपुर-कोल्हान में औषधि विभाग ने सघन जांच अभियान चलाया।

  2. पारा युक्त कॉस्मेटिक्स, बीपी-थायराइड दवाओं पर कड़ी नजर।

जासं, जमशेदपुर। बुखार, बीपी, थायराइड और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर देश भर में चिंता बढ़ गई है। 
 
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में कुल 330 दवाएं गुणवत्ता जांच में मानक के अनुरूप नहीं पाई गईं। 
 
रिपोर्ट सामने आने के बाद जमशेदपुर समेत पूरे कोल्हान प्रमंडल में औषधि विभाग ने सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है।
 
जांच के दायरे में वजन घटाने और मधुमेह के इलाज में प्रयुक्त होने वाले इंजेक्शन, बीपी और थायराइड की दवाएं, पैरासिटामोल और एंटीबायोटिक शामिल हैं। 
 
इसके अलावा सीडीएससीओ की रिपोर्ट में पांच कॉस्मेटिक उत्पादों में निर्धारित सीमा से अधिक 'पारा' (Mercury) पाया गया है, जिनमें गोरी क्रीम के चार उत्पाद और एक बॉडी लोशन शामिल हैं। 
 
कुछ फेयरनेस क्रीम में 'हाइड्रोक्विनोन' भी मिला है। औषधि विभाग ने कोल्हान के सभी दवा कारोबारियों को पत्र भेजकर गुणवत्ता जांच में फेल हुई दवाओं के बैच नंबर की सूची सौंपी है। 
 
कारोबारियों से संबंधित बैच की आवक, अब तक हुई बिक्री, खपत और बचे हुए स्टॉक का पूरा विवरण मांगा गया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इनमें से कितनी दवाएं जमशेदपुर और कोल्हान के बाजार में पहुंची हैं।
 
ड्रग इंस्पेक्टर सोनी बारा ने बताया कि इस तरह की दवाओं पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है। यदि ये दवाएं बाजार में मिलती हैं तो उन्हें तत्काल वापस मंगाने (रिकॉल) की कार्रवाई की जाएगी। 
 
सभी मेडिकल दुकानों को संबंधित बैच की दवाओं की बिक्री तुरंत रोकने का निर्देश दिया गया है। जमशेदपुर में पैरासिटामोल, बीपी और थायराइड की दवाओं की भारी खपत को देखते हुए इन बैचों की पहचान कर उन्हें बाजार से हटाना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो सके।