जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। आखिरकार एयर इंडिया टाटा की हो गयी। अठारह हजार करोड की बोली लगाकर एयर इंडिया को टाटा समूह ने अपने नाम किया। यह खबर मिलते ही झारखंड के जमशेदपुर में खुशी की लहर दौड पडी। यहां खुशी की खास वजह भी है। यह टाटा का शहर है। यहां बसनेवालों का टाटा से आत्मीय जुडाव है। जेआरडी टाटा के सपनों के इस शहर के लिए खबर जो खास रही। जमशेदपुर से ही टाटा ने पूरी दुनिया में पांव पसारे एवं टाटा समूह के रूप में विशाल वट वृक्ष बना।

एयर इंडिया को टाटा समूह के नाम करने की खुशी रतन टाटा के साथ टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने भी ट्वीटर संदेश के माध्यम से साझा की। दोनों ने इसे यादगार पल बताया। झारखंड के पूर्व मंत्री एवं जमशेदपुर पूर्वी के निर्दलीय विधायक सरयू राय ने भी एयर इंडिया के अधिग्रहण पर खुशी जतायी। उन्होंने इसके लिए टाटा समूह को बधाइ दी। उम्मीद जतायी कि एयर इंडिया विमानन सेवा के क्षेत्र में पुराना गौरव हासिल करेगा।

जेआरडी ने की थी टाटा एयरलाइंस की स्थापना

आपको मालूम हो कि जेआरडी टाटा भले ही देश के सबसे बड़े समूहों में से एक टाटा समूह के चेयरमैन थे लेकिन उनका पहला प्यार विमान उड़ाना था। वे भारत के पहले कॉर्मिशयल पायलट थे। वर्ष 1930 में आगा खान पुरस्कार में शामिल होने के लिए उन्होंने भारत से इंग्लैड के लिए एकल उड़ान भरी थी। दो साल बाद ही उन्होंने टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी जिसका नाम बदल कर एयर इंडिया रखा गया । एयर इंडिया की स्थापना के 50 वर्ष बाद भी युवा पीढ़ी में रोमांच पैदा करने के लिए 78 वर्ष की उम्र में जेआरडी टाटा ने करांची से बॉम्बे तक की उड़ान भरी थी।

एयर इंडिया से आत्मीय जुडाव

पिछले दिनों लिंक्डइन के ब्रांड कस्टोडियन हरीश भट्ट ने जेआरडी टाटा के जीवन से जुड़ी एक कहानी साझा की थी जिसमें बताया था कि एक बार जेआरडी टाटा एयर इंडिया की यात्रा कर रहे थे। उनके बगल में आरबीआई के पूर्व गर्वनर एलके झा बैठे हुए थे। अचानक जेआरडी टाटा अपनी सीट छोड़कर चले गए और एक घंटे बाद वापस आए। जब एलके झा ने पूछा कि वे कहां चले गए थे तो जेआरडी टाटा ने जवाब दिया कि टॉयलेट साफ ही कि नहीं, यह देखने गया था। झा ने सवाल किया कि ये देखने के लिए इतनी देर। तब उन्होंने जवाब दिया कि टॉयलेट पेपर ठीक से नहीं लगा था, उसे ठीक कर रहा था।

टाटा समूह के लिए यादगार पल

इस यात्रा के बाद जेआरडी टाटा इंडियन एयरलाइंस के हर बोइंग विमान के टॉयलेट में गए और व्यक्तिगत रूप से सभी टॉयलेटों की जांच की। जहां गलती दिखी उसे व्यक्तिगत रूप से सुधारा भी। एलके झा ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि जेआरडी टाटा एयर इंडिया के चेयरमैन नहीं थे फिर भी उन्हें यात्री सुविधा को बेहतर बनाने की हमेशा चिंता रहती थी। वे अपनी हर विमान यात्रा के बाद एक नोट कर्मचारियों को छोड़कर जाते थे। जिसमें यात्री सुविधा को बेहतर बनाने के लिए मेंटेनेंस व एयरलाइंस स्टाफ के लिए कुछ टिप्पणी होती थी। एकबार फिर एयर इंडिया टाटा की हो गयी तो वाकइ समूह के लिए खास पल बन गया।

Edited By: Rakesh Ranjan