जासं, जमशेदपुर : टाटा स्टील से अवकाश प्राप्त अधिकारी प्रभात शर्मा के बेटे कनिष्क को यूपीएससी की फाइनल परीक्षा में देश में 43वां रैंक मिला है। वर्ष 2020 की परीक्षा में वह वेटिंग लिस्ट में था। वे लोयोला स्कूल के पूर्व छात्र रह चुके हैं। वे वर्तमान में दिल्ली में एसिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के रूप में पदस्थापित है। वर्ष 2019 की परीक्षा में पिछले साल यूपीएससी की रिजर्व लिस्ट प्रकाशित हुई थी।

इसमें कनिष्क को 36वां स्थान मिला था। इसी से असिस्टेंट कमिशनर की नौकरी प्राप्त हुई। कनिष्क के माता-पिता का घर जमशेदपुर के बारीडीह स्थित विजया गार्डन में रहते हैं। मूल रूप से कनिष्क का परिवार बिहार के गया जिले के कोच प्रखंड के चिचारे गांव के रहने वाल हैं। कनिष्क के पिता टाटा स्टील के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं।

बैंक की नौकरी और आइएएस की तैयारी

कनिष्क ने लोयोला स्कूल से 12वीं की परीक्षा वर्ष 2006 में उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने बीट्स पिलानी से इलेक्ट्रानिक्स में बीटेक किया। इसके बाद से उन्होंने कई नौकरियां की। सबसे पहले उन्होंने अमरिका की कंपनी एनभीडिया में इंजीनियर के रूप में काम किया। इसके बाद एचएसबीसी बैंक में काम किया। उसके बाद वे 2015 में दिल्ली आ गए और यहा रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड में कार्य किया। दिल्ली में रहकर यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी प्रारंभ की। काम करने के दौरान उन्हें इस परीक्षा के लिए कोई विशेष समय नहीं मिलता था। हां सप्ताह के अंत में बैंक की छुट्टी और कार्य की छुट्टी के समय पढ़ता था। 

अपने माता-पिता के साथ कनिष्क।

झारखंड में काम करना चाहते हैं कनिष्क

कनिष्क ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा के विरूद्ध उन्होंने यूपीएससी की तैयारी को जारी रखा और अंतत: चौथे प्रयास में मुख्य रैंक में स्थान मिला। उन्होंने बातचीत में कहा कि वह झारखंड में आकर कार्य करना चाहते हैं। इसके लिए वे अनुरोध भी करेंगे।

झारखंड में काम करने का बेहतरीन स्कोप है

कनिष्क बताते हैं कि देश के किसी भी राज्य से झारखंड में सबसे ज्यादा काम करने का स्कोप है। झारखंड के लोग वाकई में अच्छे हैं। यहां की जनता की सेवा करके मुझे काफी शकून मिलेगा। झारखंड के हर युवा के पास आइएएस व आइपीएस बनने का सपना होना चाहिए।

रांची में पदस्थापित भाई से मिली आइएएस बनने की प्रेरणा

वर्ष 2015 में यूपीएससी की परीक्षा में उत्तीर्ण करण सत्यार्थी कनिष्क के चचेरे भाई है। वह साहेबगंज की एसडीएम रह चुके हैं। वर्तमान में वह स्वास्थ्य विभाग में निदेशक के पद पर रांची में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि उनके भाई ने वर्ष 2016 से ही यूपीएससी की तैयारी में विशेष मदद की तथा मार्गदर्शन किया। कनिष्क अपने परिवार में तीसरे सदस्य हैं जो आइएएस बनने जा रहे हैं।

डॉगी पालने के शौकीन हैं कनिष्क

कनिष्क के पिता प्रभात शर्मा टाटा स्टील कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन के हेड के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं। उनका तबादला टाटा स्टील बीएसएल प्रोजेक्ट अंगुल में हेड प्रशासन के रूप में हो गया था। माता रश्मि शर्मा गृहणी है। कनिष्क की मंगेतर चित्रावत्स सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता है। वर्तमान में कनिष्क का सारा परिवार दिल्ली में ही रहता है। कनिष्क खुद श्वान के शौकीन है। उनके यहां पांच श्वान हैं।

बोले कनिष्क, कम पढ़ने और अनुशासित होकर पढ़ने से मिलेगी सफलता

यूपीएससी में 43वां रैंक प्राप्त करने वाले कनिष्क बताते हैं कि यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए यह जरूरी नहीं कि वे ज्यादा से ज्यादा पढ़े। कम ही पढ़े, लेकिन अच्छे मेटेरियल पढ़े और यह अनुशासित होकर पढ़े। पढ़ाई कम समय के लिए ही सही लेकिन रोजाना पढ़े। तमाम नई चीजों के बारे में ध्यान जरूर रखें। आइएएस की नौकरी करने का अर्थ है लोगों की सेवा करना। इसमें सबसे ज्यादा सेवा करने का अवसर मिलता है।

जमशेदपुर के छात्रों में है दम

यूपीएससी में 43वां रैंक प्राप्त करने वाले कनिष्क ने कहा कि जमशेदपुर के छात्रों में काफी दम है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता नहीं चल रहा है कि क्यों छात्र इंजीनियरिंग व मेडिकल के पीछे भागते हैं। यहां के छात्रों में यूपीएससी की परीक्षा को जब चाहे तब क्रेक कर सकते हैं। उन्होंने जमशेदपुरिया छात्रों से आग्रह किया कि वे यूपीएससी की परीक्षाएं दें और लगातार प्रयास करें तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

Edited By: Jitendra Singh