जासं, जमशेदपुर : टाटा संस के पूर्व चेयरमैन जेआरडी टाटा देश के पहले कमर्शियल पायलट थे, जिन्होंने वर्ष 1932 में टाटा एयर सर्विसेज शुरुआत की थी। जेआरडी टाटा ने पहली बार सिंगल इंजन विमान, हैविललैंड पुस मॉथ विमान को कराची से उड़ाकर बॉम्बे के जुहू एयरोड्राम लाए थे। टाटा एयर सर्विसेज, जो 29 जुलाई 1946 को पब्लिक लिमिटेड कर एयर इंडिया और वर्ष 1953 में सरकार द्वारा अधिग्रहण कर इंडियन एयरलाइंस व एयर इंडिया बना था। लेकिन केंद्र सरकार ने जब उड्डयन क्षेत्र की कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करने की पहल की तो जेआरडी टाटा इसके विरोध में थे। 

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लिखा था पत्र

इस मामले में उन्होंने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि बिना चर्चा किए किसी भी कंपनी का निजीकरण निराशाजनक है। जबकि सरकार को एयरलाइंस चलाने का कोई अनुभव भी नहीं है। राष्ट्रीयकरण से उड़ान सेवाओं में सिर्फ नौकरशाही और सुस्ती दिखाई देगी। इससे कर्मचारियों का मनोबल और यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं, दोनों में गिरावट आएगी। 68 साल पहले जेआरडी टाटा द्वारा की गई यह भविष्यवाणी आज सही साबित हो रही है।

1953 में एयरलाइंस का नियंत्रण सरकार ने अपने हाथों में लिया

15 सितंबर 2021 को टाटा संस कर्ज में डूबी एयर इंडिया की वित्तीय बोली प्रक्रिया में शामिल हो गई। टाटा के साथ स्पाइसजेट भी इस रेस में शामिल है। बोली प्रक्रिया के लिए 15 सितंबर की समय सीमा तय की गई थी। टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना की, जिसे बाद में एयर इंडिया नाम दिया गया। सरकार ने 1953 में एयरलाइंस का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया लेकिन जेआरडी टाटा 1977 तक इसके अध्यक्ष बने रहे।

जेआरडी बने थे पहले चेयरमैन

टाटा एयरलाइंस का भले ही राष्ट्रीयकरण हो गया हो और इस फैसले से जेआरडी टाटा जरूर नाराज थे। इसके बावजूद जेआरडी के अनुभव और विमानन सेवा के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए एयर इंडिया का चेयरमैन बनाया गया। जेआरडी टाटा का मानना था कि राष्ट्रीयकरण की वजह से भारतीय विमानन सेवाओं के मानकों में किसी तरह की गिरावट नहीं आनी चाहिए।

जेआरडी खुद देखते थे व्यवस्था, कर्मचारियों के लिए छोड़ते थे नोट्स

चेयरमैन होने के बावजूद जेआरडी टाटा भारतीय विमानन सेवा की पूरी व्यवस्था खुद देखते थे। उनकी विमानन सेवा से यात्री खुश है या नहीं, इसके लिए वे बीच-बीच में यात्रा भी करते थे और हर सफर के बाद यात्री सुविधा को बेहतर बनाने के लिए संबधित विमान के कर्मचारियों के नाम नोट्स भी छोड़ते थे, जो विमानन सेवा में सुधार जैसे यात्रियों को परोसे जाने वाले वाइन की गुणवत्ता, एयर होस्टेस का व्यवहार, उनकी साड़ी का पहनावा और बालों के स्टाइल से संबधित होते थे। इसके अलावा वे यात्रियों से भी बात कर उनसे हवाई सफर के दौरान उनके अनुभव जानने की कोशिश करते थे।

खुद बदलने चले गए थे टॉयलेट पेपर

जेआरडी टाटा भले ही टाटा संस के चेयरमैन थे लेकिन उनका पहला प्यार विमान उड़ाना था। एयर इंडिया के चेयरमैन बनने के बाद उनका यह समर्पण और अधिक बढ़ा। वे हर खामी को खुद दूर कर दूसरों के सामने मिसाल पेश करते थे। जहां गंदगी देखी खुद डस्टर मंगवाकर सफाई करते थे।

उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी को पिछले दिनों टाटा समूह के ब्रांड कस्टोडियन हरीश भट्ट ने साझा की थी। आरबीआई के पूर्व गवर्नर एलके झा एक बार एयर इंडिया के विमान से यात्रा कर रहे थे। उनके बगल में बैठे जेआरडी टाटा अचानक उठकर चले गए। कुछ देर बाद जब लौटे तो एमके झा ने पूछा तो जेआरडी ने बताया कि टॉयलेट पेपर ठीक से नहीं लगा था, उसे ठीक कर रहा था।

 

Edited By: Jitendra Singh