जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। टाटा वर्कर्स यूनियन में कार्यरत कर्मचारियों को अधिकतम 50,793 रुपये और न्यूनतम 35,522 रुपये बोनस मिलेगा। यूनियन कार्यालय में हुए समझौते के बाद सभी 29 कर्मचारियों (27 स्थायी, दो संविदा कर्मचारी) के बैंक खाते में बोनस की राशि भी भेज दी गई है। यूनियन कार्यालय में कुल 27 कर्मचारी हैं जिन्हें वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए कुल 11 लाख 43 हजार 468 रुपये बोनस मिलेगा। वहीं, संविदा में कार्यरत दो कर्मचारी (जयदेव उपाध्याय व एमएन कुमार) को 14-14 हजार रुपये बोनस के रूप में मिलेंगे।

यूनियन नेतृत्व का दावा है कि पिछली बार की तुलना में एक बार एक प्रतिशत ज्यादा यानि 18 प्रतिशत बोनस हुआ है। बोनस समझौते पर प्रबंधन के रूप में यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह, महामंत्री सतीश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष शाहनवाज आलम, शत्रुघ्न राय, संजय सिंह, सहायक सचिव अजय चौधरी, नितेश राज, सरोज सिंह व कोषाध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने हस्ताक्षर किया।

स्टील सिटी प्रेस में अधिकतम 33,664 रुपये बोनस

स्टील सिटी प्रेस में भी मंगलवार को बोनस समझौता हुआ। यहां कार्यरत नौ कर्मचारियों को अधिकतम 33,664 रुपये और न्यूनतम 24,730 रुपये बोनस मिलेगा। बोनस पर कंपनी प्रबंधन कुल दो लाख 17 हजार 980 रुपये खर्च करेगी। बोनस का पैसा कर्मचारियों के बैंक खाते में 30 सितंबर तक भेज देगी। बोनस समझौते पर प्रबंधन की ओर से एमडी मालती पांडेय जबकि टाटा वर्कर्स यूनियन की ओर से अध्यक्ष संजीव चौधरी और महासचिव सतीश कुमार सिंह सहित अन्य ने हस्ताक्षर किए।

टाटा माेटर्स में लगी है टकटकी

टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में पिछले दिनों यूनियन नेतृत्व की आईआर हेड दीपक कुमार के साथ एक दौर की वार्ता हुई थी। इसके बाद अब तक दोनो पक्षों की वार्ता नहीं हो पाई है। टाटा मोटर्स में लौहनगरी की एकमात्र ऐसी कंपनी है जहां बोनस के साथ-साथ बाइ-सिक्स कर्मचारियों का स्थायीकरण भी होता है। ऐसे में बाइ-सिक्स कर्मचारियों की हमेशा नजर बोनस वार्ता पर टिकी हुई है। क्योंकि पिछली बार कंपनी में 221 बाइ-सिक्स कर्मचारी स्थायी हुए थे। ऐसे में कोविड काल में जब उत्पादन प्रभावित हुआ है तो इसका सीधा असर बोनस व स्थायीकरण पर भी पड़ेगा। ऐसे में स्थायी होने वाले कर्मचारियों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार कितने कर्मचारी स्थायी होते हैं। स्थायीकरण की सूची में उनका नंबर आता है या नहीं।  

Edited By: Rakesh Ranjan