जमशेदपुर : टाटा समूह जो कुछ भी करती है, हमेशा बड़ा ही करती है। टाटा समूह हमेशा से खेलों को बढ़ावा देने के लिए पहल करती ही रहती है। इसी दिशा में आगे बढ़ती हुई टाटा कंसल्टेशन सर्विसेज (टीसीएस) ने दुनिया भर में मैराथन आयोजित करने के लिए अगले आठ वर्षो में 320 मिलियन डॉलर खर्च करेगी।

ग्लोबल स्पोर्ट्स में खर्च करने वाली विश्व की शीर्ष कंपनी

ऐसे में टाटा समूह वैश्विक स्तर पर खेलों का आयोजन पर खर्च करने वाली कंपनियों की सूची सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंच चुकी है। टीसीएस ने वर्ष 2008 में सबसे पहले लंबी दौड़ के लिए मैराथन का आयोजन किया था। इसकी शुरूआत मुंबई मैराथन से हुई थी। जिसमें टीसीएस जूनियर स्पॉंसर के तौर पर शामिल हुई थी। लेकिन इसके बाद टीसीएस कंपनी ने स्वीडन, लंदन और न्यूयॉर्क में लगभग छह खेल आयोजनों में मुख्य स्पॉंसर बनकर उभरी।

लंदन मैराथन का भी मुख्य प्रायोजक है टीसीएस

टीसीएस के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर राजश्री आर का कहना है कि वर्ष 2014 में से कंपनी दुनिया के सबसे बड़े मैराथन को प्रायोजित कर रहा है। उन्होंने बताया कि यूएस बाजार, टीसीएस के लिए विश्व के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। जो टीसीएस के कुल 22 अरब डॉलर के रेवेन्यू का लगभग आधार योगदान देता है। उन्होंने बताया कि टीसीएस ने लंदन मैराथन के लिए दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हेडलाइन स्लॉट जीता था। टीसीएस अपने मैराथन आयोजनों द्वारा भारतीय कंपनियों की छवि को बेहतर बनाने और दर्शकों और प्रतिभागियों को अपने सेवाओं के बारे में बताता है। आपको बता दें कि टीसीएस के प्रबंधक निदेशक सह टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन भी मैराथन दौड़ते हैं शायद इसलिए कंपनी मैराथन जैसे आयोजनों को सबसे ज्यादा प्रायोजित करती है।

मैराथन सहित इन खेलों को भी प्रायोजित करती है टीसीएस

राजश्री ने बताया कि टीसीएस केवल मैराथन ही नहीं बल्कि गोल्फ, आइस हॉकी और मोटर रेसिंग जैसे खेल प्रतियोगिताओं को भी प्रायोजित करता है। उन्होंने बताया कि कंपनी अपने खेल बजट का 80 प्रतिशत मैराथन के लिए जबकि शेष अन्य खेलों के लिए खर्च करती है। कंपनी आगे और भी कई मैराथन प्रायोजित करने की योजना बना रही है। विशेष रूप से यूरोप और उत्तरी अमेरिका में होने वाला है। अगले आठ वर्षो में कंपनी मैराथन के लिए 40 मिलियन डॉलर तक खर्च करेगा।

एंटवर्प ओलंपिक में भारतीय टीम को दोराबजी टाटा ने किया था प्रायोजित

आपको बता दें कि टाटा समूह के संस्थापक जमशेद जी टाटा के बेटे और समूह के चेयरमैन सर दाेराबजी टाटा ने सबसे पहले एंटवर्प ओलंपिक में सबसे पहले वर्ष 1920 में भारतीय टीम को प्रायोजित किया था। उन्होंने जब देखा के भारतीय एथलीट बिना जूते के दौड़ते हुए देखा तो उन्हें अंतराष्ट्रीय मानको के तहत एथलीट को सुविधा देने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय टीम को प्रायोजित करने का फैसला किया।

Edited By: Jitendra Singh