जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : धृतराष्ट्र से राष्ट्र की ओर की यात्रा का नाम है धर्म जागरण। नई पीढ़ी में ऐश की जगह देश के काम आने वाले गुण विकसित करने हैं। झारखंड में धर्म जागरण समन्वय के बैनर तले अपनी प्रस्तुति देने निकले बाबा सत्यनारायण मौर्य ने ये बातें कहीं। वे मंगलवार को बिष्टुपुर स्थित एक होटल में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि जेनिटिक मॉडिफिकेशन की वजह से नई पीढ़ी मूल्यों को भूलती जा रही है। धर्म के सार्वजनिक स्वरूप की चर्चा को बताते हुए बाबा ने बताया कि राम ने उत्तर से दक्षिण तक भारत को जोड़ा। भारतवंशियों को संगृहीत किया। कैलाश मानसरोवर राजनैतिक दृष्टि से दूसरे राष्ट्र में भले हो, लेकिन सास्कृतिक दृष्टि से हमारे राष्ट्र में है, ऐसा सभी मानते हैं। धर्म से नई पीढ़ी को यदि नहीं जोड़ेंगे तो मूल्यों का विलोपन होगा। सामाजिक समरसता के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जातिवाद के नाम पर लोगों के काम धंधे नष्ट हो रहे है। जातिवाद नेताओं के दिमाग का भ्रम है और कुछ नहीं। सामाजिक संतुलन की चर्चा करते हुए बताया कि शकर के दो पुत्र भैरव और हनुमान हैं। दोनों की रुचि और स्वभाव अलग अलग है। एक को मास, शराब सब अर्पित होता है, जबकि दूसरे को इस तरह का कुछ भी नहीं लगता।

ज्ञात हो बाबा सत्यनारायण मौर्य 14 अगस्त को साकची स्थित राजेंद्र विद्यालय ऑडिटोरियम में शाम छह बजे से एकल काव्य पाठ व भारत वंदन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। 16 अगस्त को देवघर में कार्यक्रम के साथ ही इनका झारखंड दौरा पूरा होगा। संवाददाता सम्मेलन में ज्ञानचंद्र जायसवाल, प्रभाकर सिंह, योगेश दवे, संजय शर्मा, विनोद सिंह, चिंटू सिंह, नीरू सिंह आदि उपस्थित थे।

महात्मा गांधी भारत के नहीं, पाकिस्तान के पिता

इधर, आदित्यपुर के गैरेज कॉलोनी निवासी सह उद्यमी संजय शर्मा के आवास पर बाबा सत्यनारायण मौर्य का एसिया अध्यक्ष इंदर अग्रवाल, उद्यमी गंगा शर्मा, रविंद्र गुप्ता, आरके अनिल आदि ने भव्य स्वागत किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गाधी भारत के पुत्र हैं, पिता नहीं। यदि पिता हैं तो पाकिस्तान के हैं, जिनके कारण पाकिस्तान का जन्म हुआ। भगत सिंह को गाधीजी ने आतंकवादी तक घोषित कर दिया था। गाधीजी के चलते सरदार पटेल प्रधानमंत्री नहीं बन पाए। पहले फिल्मों में भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का प्रयास हुआ है। जानबूझ कर पुजारी को बलात्कारी, पुलिसवालों को बनिया और कारोबारी को शोषक दिखाया जाता था।

Posted By: Jagran