88 डिग्री पर उबलता पानी, फिर भी नहाने के लिए उमड़ती है भीड़; हजारीबाग के सूर्यकुंड का क्या है रहस्य?
हजारीबाग के बरकट्ठा स्थित सूर्यकुंड में 88 डिग्री सेल्सियस तक गर्म पानी निकलता है, जो धार्मिक मान्यताओं और पर्यटन का ...और पढ़ें

हजारीबाग में सूर्यकुंड। जागरण
डिजिटल डेस्क, हजारीबाग। सर्दियों में गर्म पानी का ख्याल आते ही राहत महसूस होती है, लेकिन अगर किसी जगह के पानी का तापमान 88 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता हो, तो क्या आप वहां जाने की कल्पना करेंगे?
हजारीबाग के बरकट्ठा स्थित सूर्यकुंड में यही बात सबसे पहले लोगों का ध्यान खींचती है। यहां धरती से निकलता गर्म पानी वर्षों से लोगों के लिए उत्सुकता का विषय बना हुआ है और इसके साथ जुड़ी धार्मिक मान्यताएं इसे आस्था का केंद्र बनाती हैं।
हजारीबाग से करीब 72 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर स्थित सूर्यकुंड में पांच कुंड हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इनके नाम सूर्य कुंड, लक्ष्मण कुंड, ब्रह्म कुंड, राम कुंड और सीता कुंड हैं। यहां पानी का तापमान 169 से 190 डिग्री फारेनहाइट यानी करीब 76 से 88 डिग्री सेल्सियस तक बताया गया है। यहां दो गर्म झरनों के अलावा एक ठंडा झरना भी मौजूद है।

पांच कुंड, हर नाम के पीछे आस्था की कहानी
सूर्यकुंड की पहचान सिर्फ गर्म पानी से नहीं है। यहां आने वाले लोगों के लिए यह जगह धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई है। पांच कुंडों के नाम भगवान राम, माता सीता और उनके परिवार से जुड़ी धार्मिक परंपरा की याद दिलाते हैं।
सूर्यकुंड से जुड़ी पौराणिक कथा को लेकर स्थानीय स्तर पर मान्यता प्रचलित है। सूर्यकुंड पंडा समिति के अध्यक्ष पुजारी नरेश पांडे बताते हैं कि भगवान राम वनवास के दौरान यहां आए थे। इसी दौरान माता सीता ने छठ व्रत के लिए कुंड की मांग की थी। उनके अनुसार, छोटे भाई लक्ष्मण ने अपने बाणों से कुंड का निर्माण किया, जिसके बाद से यहां गर्म जलधारा प्रवाहित होने की मान्यता है।

सूर्यकुंड का उद्भव प्राचीन काल में हुआ था। मान्यता है कि भगवान राम वनवास के दौरान यहां आए थे। इस दौरान माता सीता ने छठ व्रत के लिए कुंड की मांग की थी। छोटे भाई लक्ष्मण ने अपने बाणों से कुंड का निर्माण किया, जिससे अनवरत गर्म जलधारा प्रवाहित हो रही है।इसके जल के सेवन से पाचन क्रिया में सुधार और त्वचा संबंधी रोगों में भी लाभ मिलने की मान्यता है। फिलहाल स्नान के लिए दो कुंड उपलब्ध हैं। सूर्यकुंड का समुचित विकास किया जाए तो इसे दूसरे प्रदेशों की तरह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने में देर नहीं लगेगी।
-नरेश पांडे, अध्यक्ष, सूर्यकुंड पंडा समिति
यहां स्वास्थ्य से जुड़े लाभ को स्थानीय मान्यता और पुजारी के कथन के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जिला प्रशासन की वेबसाइट भी सूर्यकुंड के पानी में उच्च सल्फर सामग्री का उल्लेख करती है और इसके चिकित्सीय प्रभाव की बात कहती है।
88 डिग्री तक गर्म पानी, फिर भी क्यों बढ़ता है आकर्षण?
सूर्यकुंड आने वाले लोगों के लिए गर्म पानी अपने आप में सबसे बड़ा आकर्षण है। खासकर ठंड के मौसम में यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। यहां सर्दियों में भी बड़ी संख्या में पर्यटक सूर्यकुंड पहुंचते हैं।
स्थानीय स्तर पर इस गर्म पानी को लेकर कई तरह की मान्यताएं भी प्रचलित हैं। पर्चे में इसे कई रोगों से राहत से जोड़कर बताया गया है, जबकि पुजारियों के अनुसार त्वचा संबंधी समस्याओं और पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी इसके लाभ की मान्यता है। इन दावों को स्थानीय धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाता है।
यही आस्था है, जो मौसम ठंडा होते ही लोगों को सूर्यकुंड तक खींच लाती है। कोई गर्म पानी में स्नान के लिए पहुंचता है तो कोई यहां की धार्मिक मान्यताओं और मंदिर के दर्शन के लिए।
कभी विकास की उम्मीद, अब व्यवस्था पर सवाल
सूर्यकुंड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोशिशें भी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक दशक पहले सरकारी खर्च से पर्यटन भवन, स्पा, स्टीम बाथ और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाओं के निर्माण पर काम हुआ था। वन विभाग की ओर से इको पार्क भी बनाया गया है, जहां दर्शक पहुंचते हैं।
लेकिन स्थानीय पुजारियों की शिकायत है कि यहां नियमित व्यवस्था का अभाव अब भी बना हुआ है। उनका कहना है कि सूर्यकुंड की प्रसिद्धि के मुकाबले सुविधाएं उस स्तर की नहीं हैं, जिसकी इस स्थल को जरूरत है।

हम सभी पुजारी सिर्फ भगवान भरोसे काम कर रहे हैं। जो कुछ चढ़ावा आता है, इसी में भगवान का काम हो रहा है। किसी तरह की कोई सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है।
-बालेश्वर पांडे, पुजारी, सूर्यकुंड

सरकार ने कभी भी सूर्यकुंड की सुध नहीं ली। न ही किसी तरह की व्यवस्था को संचालित किया गया। आज जब सूर्यकुंड की ख्याति दूर तक है, इसके बावजूद आज भी हालत पुराने ही हैं।
-शंभू पांडे, पुजारी, सूर्य मंदिर
आस्था बड़ी, लेकिन क्या विकास भी उतना होगा?
सूर्यकुंड की कहानी सिर्फ गर्म पानी की नहीं है। यहां एक तरफ प्रकृति का ऐसा स्वरूप है, जहां पानी का तापमान 88 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, तो दूसरी तरफ पांच कुंडों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं। सर्दियों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी इसकी लोकप्रियता बताती है।

मकर संक्रांति के आसपास यहां लगने वाला मेला भी सूर्यकुंड को धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ता है। वर्षों से यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह जगह आस्था का केंद्र बनी हुई है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि सूर्यकुंड का पानी इतना गर्म कैसे है। सवाल यह भी है कि जिस जगह की पहचान गर्म जल, धार्मिक आस्था और पर्यटन- तीनों से बनी हुई है, उसे उसकी क्षमता के मुताबिक सुविधाएं और विकास कब मिलेगा?
