पकरी बरवाडीह परियोजना ने हासिल किया बड़ा मुकाम, 100 मिलियन टन कोयला उत्पादन का रचा कीर्तिमान
एनटीपीसी की पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना ने स्थापना के बाद से 100 मिलियन मीट्रिक टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।

एनटीपीसी पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना (जागरण)
HighLights
पकरी बरवाडीह परियोजना ने 100 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया।
तीन साल से कम समय में उत्पादन दोगुना कर 100 एमएमटी तक पहुंचाया।
एशिया की सबसे लंबी क्लोज्ड कोयला कन्वेयर प्रणाली का उपयोग।
संवाद सूत्र, बड़कागांव (हजारीबाग)। एनटीपीसी पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना ने स्थापना के बाद से अब तक 100 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।
इस उपलब्धि के साथ परियोजना ने देश की अग्रणी कोयला खनन परियोजनाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है।
परियोजना में कोयला उत्पादन की शुरुआत जनवरी 2017 में हुई थी, जबकि पहला रेल रैक फरवरी 2017 में भेजा गया।
इसके बाद अप्रैल 2019 में इसे वाणिज्यिक रूप से घोषित किया गया। तेज रफ्तार विकास का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मई 2023 में 50 एमएमटी का आंकड़ा पार करने के बाद मात्र तीन वर्षों से भी कम समय में उत्पादन दोगुना कर 100 एमएमटी तक पहुंचा दिया गया।
इस उपलब्धि के पीछे कई अहम अवसंरचनात्मक और परिचालन उपलब्धियां रही हैं। वर्ष 2022 में कोल हैंडलिंग प्लांट के स्ट्रीम A और B का सफल कमीशनिंग, दिसंबर 2024 में 20,000वें रेल रैक का प्रेषण और अगस्त 2024 में रैपिड लोडिंग सिस्टम के साथ एकीकरण ने कोयला परिवहन को तेज और प्रभावी बनाया।
परियोजना एशिया की सबसे लंबी क्लोज्ड कोयला कन्वेयर प्रणाली से भी सुसज्जित है, जो खदान को बनादाग रेलवे साइडिंग से जोड़ती है और पर्यावरण अनुकूल निर्बाध परिवहन सुनिश्चित करती है।
इस सफलता का श्रेय जनहितकारी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया, Government of Jharkhand के सहयोग तथा स्थानीय ग्रामीणों और अन्य हितधारकों के निरंतर समर्थन को दिया जा रहा है। शीर्ष प्रबंधन के मार्गदर्शन ने भी परियोजना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पूरी टीम की मेहनत का परिणाम
इस मौके पर परियोजना प्रमुख (PB एवं PB-NW सीएमपी) Subrat Kumar Das ने कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि परिचालन, सुरक्षा और सामुदायिक सहभागिता के संतुलित प्रयासों से ही ऐसे मील के पत्थर हासिल किए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने दोहराया कि पकरी बरवाडीह परियोजना सतत खनन प्रथाओं के जरिए देश की ऊर्जा सुरक्षा में अहम योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
