हजारीबाग: जंगल के बीच बसे हरदिया में थमी तरक्की, सड़क-पुल नहीं होने से 6 किमी पैदल चलने को मजबूर स्कूली बच्चे
हजारीबाग के हरदिया गांव में सड़क, पुल, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे ग्रामीण जूझ रहे ...और पढ़ें

सड़क-पुल नहीं होने से 6 किमी पैदल चलने को मजबूर स्कूली बच्चे
HighLights
हरदिया गांव में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
लुकुइया नाले पर पुल न होने से बच्चों को 6 किमी चलना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क और स्थायी पुल बनाने की मांग की।
संवाद सूत्र, टाटीझरिया (हजारीबाग)। प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर धर्मपुर पंचायत का हरदिया गांव घने जंगल के बीच बसा है। पूर्णतः आदिवासी आबादी वाले इस गांव के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल और शिक्षा जैसी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है।
सबसे बड़ी समस्या गांव तक पहुंचने वाली पक्की सड़क और लुकुइया नाले पर पुल की है। सड़क नहीं होने के कारण सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। किताब-कॉपी लेकर बच्चे पहाड़ी और उबड़-खाबड़ रास्तों से करीब छह किलोमीटर पैदल या साइकिल के सहारे धर्मपुर और टाटीझरिया स्थित स्कूलों में पहुंचते हैं।
बरसात के दिनों में लुकुइया नाले का जलस्तर बढ़ जाने से बच्चों और बुजुर्गों के लिए आवागमन और भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दौरान नाले में सात से दस फीट तक पानी बहता है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
क्षेत्र में आता है हाथियों का झुंड
ग्रामीण महेश मांझी ने बताया कि क्षेत्र में कभी-कभी जंगली हाथियों का झुंड भी पहुंच जाता है। ऐसे समय ग्रामीणों को रातभर जागकर पहरा देना पड़ता है और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उनका स्कूल जाना भी बंद कर दिया जाता है।
सोहन मांझी ने बताया कि गांव में नव प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन वहां पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई होती है। इसके बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए धर्मपुर जाना पड़ता है। सड़क और पुल नहीं होने के कारण बच्चों को काफी परेशानी होती है।
सोमर मांझी ने बताया कि मुखिया की पहल से गांव के अंदर पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया है, जिससे गांव में आवागमन और साफ-सफाई की स्थिति में सुधार हुआ है।
पुल का निर्माण ग्रामीणों की सबसे बड़ी जरूरत
वहीं रामलाल टुड्डू ने कहा कि हरदिया तक सड़क और लुकुइया नाले पर पुल का निर्माण ग्रामीणों की सबसे बड़ी जरूरत है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब सात वर्ष पहले उन्होंने श्रमदान कर बांस और लकड़ी की मदद से अस्थायी पुल बनाया था। इसी के सहारे लोग नाला पार करते थे, लेकिन अब वह पुल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
इसके बाद ग्रामीणों को दोबारा नाले से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से हरदिया तक सड़क निर्माण कराने और लुकुइया नाले पर स्थायी पुल बनाने की मांग की है।
मोबाइल नेटवर्क भी बड़ी समस्या
हरदिया गांव में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा भी सुचारू नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के कई हिस्सों में मोबाइल काम नहीं करता। गांव जाने से पहले स्कूल के आसपास ही मोबाइल नेटवर्क मिल पाता है। इससे आपात स्थिति में परिजनों और प्रशासन से संपर्क करने में भी परेशानी होती है।
