विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हजारीबागः गाय पालकर बेटे को अफसर बनाया, JPSC परीक्षा रद हुई तो टूट गया पिता का सपना

Published: Thu, 20 Aug 2026 08:29 AM (IST)

अरुण कुमार यादव ने पिता के संघर्ष से प्रेरणा लेकर जेपीएससी परीक्षा में उपसमाहर्ता पद पर सफलता पाई, लेकिन सरकार ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

एआई जेनरेटेड इमेज।

HighLights

  1. पिता के संघर्ष से बेटे ने जेपीएससी में उपसमाहर्ता पद पाया।

  2. परिवार ने निष्पक्ष जांच और मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य की मांग की।

संवाद सूत्र, हजारीबाग। हजारीबाग के लेपो रोड निवासी अरुण कुमार यादव की सफलता के पीछे उनके पिता सरयु गोप के वर्षों के संघर्ष और त्याग की कहानी है। आर्थिक तंगी के बावजूद पिता ने गाय पालकर और दूध बेचकर बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया।

बेटे ने भी पिता के संघर्ष को अपनी ताकत बनाया और कड़ी मेहनत के दम पर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में सफलता हासिल कर उपसमाहर्ता (Deputy Collector) के पद पर चयनित हुए। वर्तमान में वह लातेहार में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे।

इसी बीच आया एक बड़ा मोड़, जहां सरकार द्वारा जेएसएससी परीक्षा रद किए जाने के फैसले से उनकी नियुक्ति भी रद् हो गई। इससे परिवार की वर्षों की मेहनत और बेटे के अधिकारी बनने की खुशी अचानक चिंता में बदल गई।

अरुण कुमार ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान केंद्र सरकार की समूह ‘ग’ श्रेणी की नौकरी में भी उनका चयन हुआ था। हालांकि उन्होंने उस नौकरी में योगदान नहीं किया और झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी जारी रखी। इसके बाद परीक्षा में सफलता हासिल कर उपसमाहर्ता के पद पर चयनित हुए।

arun kumar ydav

पिता के संघर्ष का मिलने वाला था फल

अरुण के पिता सरयु गोप ने बेटे की पढ़ाई के लिए वर्षों तक गाय पालकर दूध बेचा। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। बेटे के अधिकारी बनने को वह अपने वर्षों के संघर्ष का फल मान रहे थे।

परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी अधिकारी बनने के बाद आर्थिक स्थिति सुधरेगी और लंबे समय से चली आ रही परेशानियां दूर होंगी। लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद परिवार के सामने फिर से भविष्य को लेकर अनिश्चितता खड़ी हो गई है।

अरुण कुमार ने कहा कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने ईमानदारी से परीक्षा दी और अपनी मेहनत के बल पर सफलता हासिल की, उनके भविष्य का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

वर्षों की मेहनत के बाद मिली नौकरी का अचानक छिन जाना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। परिवार चाहता है कि सरकार ऐसा न्यायपूर्ण रास्ता निकाले, जिससे दोषियों को सजा मिले और मेहनती व निर्दोष अभ्यर्थियों का भविष्य बर्बाद न हो।