अरविद राणा, हजारीबाग : अपने जीवन में मैने कभी नहीं सोचा था कि पीने के पानी को रैल टैंकर के माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजकर लोगों की प्यास बुझाकर जीवन बचाया जाएगा। लेकिन ऐसा मेरे आंखों के सामने हो रहा है और अभी मुझे आधा जीवन और जीना है। अभी ये हाल है तो आने वाले समय में पानी के बिना देश का क्या हाल होगा। आवश्यकता है कल को बचाने के लिए आज को सुरक्षित रखने का। हम सुरक्षित तभी रह पाएंगे जब जल को सुरक्षित रख पाएंगे। उक्त बातें एसडीएम मेघा भारद्वाज ने कही । दैनिक जागरण के जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण अभियान पर उन्होंने बेबाक तरीके से अपनी बातों को रखते हुए पानी पर विचार प्रकट किए। बताया कि पानी बचाने के लिए हमें इसका उपयोग करने के तरीके पर बल देना होगा। कहा कि हर घरों में आज नल खोलकर पैर धोने और पाइप से वाहन धोने का प्रचलन बढ़ा है। इससे तीन गुना अधिक पानी बर्बाद हो रही है। इस पानी की बर्बादी को रोकने के लिए हम लोटा और बाल्टी का उपयोग कर रोक सकते हैं। बताया कि हम स्नान करने के लिए सीधे शॉवर का उपयोग करते हैं, जबकि यहां हम इससे कम पानी में ही लोटा और बाल्टी के माध्यम से स्नान कर पानी बचा सकते हैं। आज भी गांव में इस विधि का सबसे अधिक उपयोग हो रहा है।

प्लास्टिक ग्लास, फोम की थाली और प्लास्टिक थैला का न करें उपयोग

एसडीएम ने लोगों से अपील करते हुए बताया कि शादी पार्टी में प्लास्टिक का ग्लास, वन भोज में फोम का पत्तल और बाजार में प्लास्टिक की थैली प्रदूषण ही नहीं बल्कि जल स्रोत को भी नष्ट कर रहे हैं। गुरुवार को एक ट्रैक्टर प्लास्टिक झील तट से निकाला गया है। ये नाली को जाम करने के साथ-साथ भू गर्भ को रिचार्ज होने नहीं दे रहे हैं। हमें पार्टी सहित अन्य त्यौहारों में स्टील का ग्लास, स्टील के बर्तन का प्रयोग करना होगा। घर से निकलते वक्त एक थैला अपने वाहन में जरूर रखें।

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पुराने घरों में भी बेहद कम खर्च पर लगाया जा सकता है वाटर रिचार्ज सिस्टम

एसडीएम मेघा भारद्वाज ने बताया कि नए घरों में अनिवार्य रूप से और पुराने घरों में बेहद कम खर्च पर वाटर रिचार्ज सिस्टम को लगाया जा सकता है। यह बेहद आसान प्रक्रिया है और पांच हजार के खर्च में बनाया जा सकता है। सोखा बनाने से घर के नल कूप बेकार भी नहीं होंगे और निगम में कर में भी छूट मिलेगी।

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संसद और सचिवालय में बोतल नहीं स्टील ग्लास में मिलता है पानी, करें जलदान

एसडीएम ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान संसद और सचिवालय में जाना हुआ। वहां भी बोतल बंद पानी की जगह गिलास में पानी मिला। इससे पानी बर्बाद भी नहीं हुआ ओर पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। वहीं आम से अपील करते हुए एसडीएम ने घरों में आए मेहमानों को जलदान करने की अपील की। कहा कि पीने के लिए जब भी किसी को पानी दे तो आधा गिलास पानी भर कर दे। जब वे दोबारा मांगे तो दोबारा पानी दें। बड़े शहरों में अब ये प्रचलन शुरू हुआ है। शुद्ध पेय जल बचाने की यह सबसे कारगर मुहिम है।

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नदी तट, तालाबों पर सुनिश्चित करे पौधरोपण

एसडीएम ने नदी तट, तालाब की मेड़ पर पौधरोपण सुनिश्चित करने को कहा है। बताया कि ये जल स्त्रोत के साथ-साथ मेघ को भी अपने ओर आकर्षित करेंगे। बरगद, पीपल, पाकर, नीम, महुआ, सहित अन्य फलदार पौधा लगाने की वकालत एसडीएम ने की। बताया कि ये चिड़ियों का भोजन के साथ साथ आम लोगों को आर्थिक रुप से मदद भी करेगा। वन विभाग से बात कर आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा पौधा

एसडीएम ने बताया कि आम लोगों को पौधा आसानी से मिल सके। इसके लिए वन पदाधिकारी से बात कर पौधा निश्चित रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। बताया कि कोई भी व्यक्ति पौधरोपण को लेकर एसडीएम कार्यालय में आवेदन दे सकता है। हमारा प्रयास होगा कि उन्हें पौधा मिल सके।

Posted By: Jagran