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उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया दशलक्षण पर्यूषण पर्व

चौथे दिन संगीतमय भजन -पूजन का भी किया गया आयोजन

जासं, हजारीबाग : दशलक्षण पर्यूषण पर्व के चौथे दिन जो उत्तम शौच धर्म का दिन है प्रात: दोनों दिगबर जैन मंदिर में सामूहिक जिनेंद्र अभिषेक भक्तगण द्वारा किया गया। बाद में संगीतमय पूजन भजन का कार्यक्रम हुआ। प्रात: 8:30 बजे बड़ा बाजार जैन मंदिर में सांगानेर से पधारे विद्वान पंडित संजीव जी ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आज उत्तम शौच धर्म का दिन है। उत्तम शौच धर्म पवित्रता का प्रतीक है। यह पवित्रता संतोष के माध्यम से आती है। जैसे जैसे लाभ व्यक्ति का होता है वैसे वैसे लोभ बढ़ जाता है। लोभ से इच्छा और इच्छा से तृष्णाएँ बढ़ती है, जिसकी पूर्ति कर पाना कभी संभव नहीं है। लोभ पाप का बाप है। संपूर्ण अनर्थों की जड़, कषायों का जनक है।ऐसे लोभ से मित्रता छोड़कर स्वयं के गुणों की मित्रता करें, यही भावना है। संध्या में दोनों मंदिरों में महाआरती व णमोकार का जाप के बाद शास्त्र वाचन व उत्तम शौच धर्म पर प्रकाश डाला। पंडित संजीव जी के द्वारा बाड़म बाजार में रात्रि 9:00 बजे प्रश्न मंच का कार्यक्रम हुआ। सभी वर्गों के लोग ने बड़े उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया, यह जानकारी मीडिया प्रभारी विजय लुहाडीया ने दी। महापर्व पर आयोजित प्रश्न मंच में सभी विजेताओं को दिगंबर जैन पंचायत के द्वारा पुरस्कृत किया गया। अध्यक्ष धीरेन्द्र सेठी, महामंत्री पवन जैन अजमेरा, जैन महिला मिलन, समाज, समिति ने पुरस्कार दिया। इसमें:कल्पना सेठी, कविता लुहाडिया, अर्चना अजमेरा, खुशबू बड़जात्या, नेहा सेठी, टुन्नु सेठी, पुनीत अजमेरा मंजू चौधरी शामिल है।

Edited By: Jagran