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पिता का साया बचपन में छूटा, आर्थिक तंगी से लड़े... अब NEET-2026 में झारखंड के दूसरे टॉपर बने हजारीबाग के संजीत

Published: Tue, 21 Jul 2026 09:34 AM (IST)Updated: Tue, 21 Jul 2026 09:38 AM (IST)

हजारीबाग के नगवां गांव के संजीत कुमार ने नीट-2026 में 666 अंक प्राप्त कर अखिल भारतीय स्तर पर 644वीं और ...और पढ़ें

आर्थिक तंगी के बावजूद संजीत ने सफलता हासिल की। जागरण

आर्थिक तंगी के बावजूद संजीत ने सफलता हासिल की। जागरण

HighLights

  1. नीट-2026 में 666 अंक, झारखंड में दूसरा स्थान।

  2. आर्थिक तंगी के बावजूद संजीत ने सफलता हासिल की।

संवाददाता सहयोगी, हजारीबाग। आर्थिक तंगी, बचपन में पिता का साया उठ जाना और सीमित संसाधनों के बीच भी यदि संकल्प मजबूत हो, तो सफलता हर बाधा को पार कर लेती है।

हजारीबाग के सदर प्रखंड के नगवां गांव के रहने वाले संजीत कुमार ने इस बात को अपनी मेहनत और लगन से साबित कर दिखाया है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादें मजबूत हो, तो कोई भी का सामना करना आसान है।

स्व. मंटू मेहता के पुत्र संजीत ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-2026 में 666 अंक प्राप्त कर अखिल भारतीय स्तर पर 644वीं रैंक हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने झारखंड में दूसरा स्थान प्राप्त कर हजारीबाग जिले का गौरव बढ़ाया है।

इस शानदार प्रदर्शन के साथ संजीत ने अखिल भारतीय स्तर पर 644वीं रैंक प्राप्त की, जबकि झारखंड में दूसरा स्थान हासिल कर हजारीबाग जिले का नाम पूरे राज्य में रोशन कर दिया। उनकी सफलता केवल एक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और अटूट संकल्प की मिसाल है। यह उपलब्धि उन हजारों छात्रों के लिए प्ररेणा है, जो सीमित संसाधनों को कारण अपने सपनों को अधूरे मान लेते हैं।

संजीत की सफलता की खबर मिलते ही नगवां गांव में खुशी का माहौल बन गया। लोगों ने इसे पूरे गांव और जिले के लिए गर्व का क्षण बताया। इस अवसर पर संवेदक संघ के अध्यक्ष दीपक कुमार मेहता ने उनके घर पहुंचकर पुष्पगुच्छ भेंट किया और सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि संजीत ने यह साबित कर दिया है कि सफलता धन-दौलत की नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की होती है। विपरीत परिस्थितियों में मिली यह सफलता समाज के हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत है।

संजीत का सपना एक सफल चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करना है। उनका संघर्ष और उपलब्धि यह संदेश देती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो मंजिल जरूर मिलती है। उनकी कहानी हर उस विद्यार्थी के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो चुनौतियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है।