हजारीबाग : हजारीबाग जिला राज्य से गुजरनेवाले प्रमुख राजमार्गो पर अवस्थित है। इस कारण यहां बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों की बसें यहां से गुजरती है। इसे लेकर यहां एक अंतर्राज्जीय बस अड्डा का निर्माण लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग है। अंतर्राज्जीय बस अड्डा के अभाव में राज्य से बाहर जानेवाले लोगों को मजबूरी में राजमार्ग पर ही बस पकड़ना पड़ता है। लेकिन करीब डेढ़ दशक गुजर जाने के बाद भी जिला के लोगों का अंतरराज्यीय बस अड्डा अब भी सपना है। जानकार बताते हैं कि इसका कारण जनप्रतिनिधियों के द्वारा इस मामले में अपेक्षित रूचि नहीं लेना है।

जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2005-06 में बस अड्डा के निर्माण के लिए योजना तैयार की गई थी। बस अड्डा के निर्माण के लिए करीब पंद्रह एकड़ भूमि नगर निगम के डंपिग यार्ड के पास आवश्यकता थी। इसमें से लगभग 7 एकड़ भूमि निगम के पास पूर्व से उपलब्ध है। मात्र आठ एकड़ दस डिसमिल भूमि का अधिग्रहण किया जाना था। आठ एकड दस डिसमिल जमीन के अधिग्रहण के लिए भू-अर्जन विभाग ने 80,00,876 रूपये की मांग रखी। इसके उपरांत नगर विकास एवं आवास विभाग के द्वारा नगर निगम को लगभग 80,00,876 रूपये उपलब्ध करा दिया गया। जिसे नगर निगम ने भू-अर्जन विभाग को राशि सौंप दी। लेकिन भू-अर्जन विभाग राशि मिलने के बाद कछुए की गति से चलता रहा। इस बीच नगर निगम के द्वारा भू-अर्जन को लेकर कई बार रिमांइडर भी भेजा गया। लेकिन भू-अर्जन विभाग इस कार्य को लेकर पूरी गंभीरता नहीं दिखाया।इस कारण वर्ष 2013-14 तक भू-अर्जन का कार्य पूरा नहीं हो सका। इस बीच बीतते समय के साथ वहां के भू-रैयतों ने न केवल भूमि देने से इंकार कर दिया, बल्कि इसे लेकर रांची हाईकोर्ट में याचिका भी दायर कर दिया। जानकारी के अनुसार अभी यह केस चल रहा है, इस पर फैसला आना बाकी है।

जानकार बताते हैं कि भू-अर्जन के लिए शासन-प्रशासन के साथ यहां के जनप्रतिनिधियों ने सही ढंग से रूचि नहीं ली। अन्यथा अब तक भू-स्वामियों को समझा-बुझाकर उनसे जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाता । लेकिन जनसमस्या को दूर करने में जप्रतिनिधियों की रूचि कम होने के कारण जनता की बहुप्रतीक्षित सपना अब भी अधूरा ही है। ---------

Posted By: Jagran

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