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हजारीबाग में खासमहल की 50 डिसमिल जमीन पर फिर बवाल, रात में जेसीबी से तोड़फोड़ का पूर्व मंत्री पर लगा आरोप

Published: Mon, 26 Oct 2026 08:37 AM (IST)

हजारीबाग के हुरहुरू स्थित खासमहल की 50 डिसमिल विवादित जमीन पर रात में जेसीबी से तोड़फोड़ का मामला सामने आया ...और पढ़ें

अंचलाधिकारी और एसडीपीओ ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का लिया जायजा। जागरण

अंचलाधिकारी और एसडीपीओ ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का लिया जायजा। जागरण

HighLights

  1. खासमहल की 50 डिसमिल जमीन पर रात में तोड़फोड़।

  2. पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर अतिक्रमण का गंभीर आरोप।

संवाद सहयोगी, हजारीबाग। शहर के हुरहुरू स्थित खासमहल की विवादित 50 डिसमिल जमीन पर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। विगत शनिवार की रात जमीन पर जेसीबी चलाकर निर्माण तोड़ने का मामला सामने आने के बाद इलाके में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

स्थानीय लोगों ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर रात के अंधेरे में तोड़फोड़ कराने और जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि पूर्व मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी जमीन की साफ सफाई की कार्रवाई बताया है।

बता दें कि इससे पहले भी पूर्व मंत्री संबंधित भूमि के पीछे के करीब 53 डिसिमिल भूमि पर भी अतिक्रमण करने का प्रयास किया था। इस दौरान पूर्व मंत्री के द्वारा जेसीबी की मदद से नाली आदि को तोड देने का आरोप लगा था। जिसे लेकर स्थानीय लोगों ने थाने में आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार विवादित जमीन पर शनिवार की देर रात जेसीबी मशीन से वहां खंडहर में तब्दील हुए भवन को तोड़ देने की सूचना फैलते ही मोहल्ले में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और मामले को लेकर विरोध जताया।

लोगों ने इसकी सूचना वार्ड वार्षद विकास यादव व पुलिस को दिया। मामले की सूचना मिलने के बाद रविवार के दोपहर सदर अंचलाधिकारी आशुतोष और सदर एसडीपीओ रूपक कुमार सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

लंबे समय से विवादों में है जमीन

बताते चलें कि हुरहुरू स्थित खासमहल की यह जमीन लंबे समय से विवाद का केंद्र बनी हुई है। इससे पहले भी इस जमीन पर निर्माण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में रहा है। पांच अक्टूबर को इसी विवादित जमीन पर उच्च न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश दिए जाने की बात सामने आई थी।

ऐसे में दोबारा तोड़फोड़ की घटना ने पूरे मामले को फिर संवेदनशील बना दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जमीन पर की गई कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुरूप थी और संबंधित पक्षों ने कानूनी प्रावधानों का पालन किया या नहीं।

पूर्व मंत्री ने आरोपों को नकारा

पूर्व मंत्री योगेंद्र साहू ने जमीन पर अतिक्रमण और अवैध तोड़फोड़ के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वे अपनी जमीन की केवल साफ सफाई करा रहे थे। प्रशासन ने मामला के हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के कारण तत्काल किसी प्रकार के हस्तक्षेप से इंकार किया। अब पूरे मामले में हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई में ही मामला स्पष्ट हो पाएगा।

मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। न्यायालय के द्वारा चार सप्ताह का समय दिया गया है। पूर्व मंत्री के द्वारा किए गए कार्यों से न्यायालय को अवगत कराया जाएगा एवं उसके दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

-आशुतोष, अंचलाधिकारी, सदर प्रखंड, हजारीबाग। 

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