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हजारीबाग में खास महल की जमीन पर भू-माफियाओं का खेल, फर्जी एग्रीमेंट से खड़ी की करोड़ों की इमारतें

Published: Thu, 17 Sep 2026 04:27 PM (IST)

हजारीबाग में खास महल की जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा करोड़ों की इमारतें खड़ी करने का खुलासा हुआ है। वे फर्जी ...और पढ़ें

भू-माफियाओं ने खास महल की जमीन पर अवैध कब्जा किया। जागरण

भू-माफियाओं ने खास महल की जमीन पर अवैध कब्जा किया। जागरण

HighLights

  1. भू-माफियाओं ने खास महल की जमीन पर अवैध कब्जा किया।

  2. फर्जी इकरारनामा के सहारे करोड़ों की इमारतें खड़ी की गईं।

विनय कुशवाहा, हजारीबाग। शहर के शहरी क्षेत्र में खास महल की जमीन का बड़ा हिस्सा इन दिनों जांच के दायरे में है। सरकार के आदेश के आलोक में खास महल पदाधिकारी के स्तर से पिछले छह महीने से जमीन का सर्वे कराया जा रहा है।

सर्वे के दौरान जमीन से जुड़े कई मामले सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी कागजात और इकरारनामा के सहारे खास महल की जमीन पर कब्जा कर लिया और देखते ही देखते वहां आलीशान मकान, मॉल, व्यावसायिक भवन, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण खड़े कर दिए।

सबसे अधिक मामला दीपूगढ़ा क्षेत्र में सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि यहां कुछ भू-माफिया महज 11 माह के इकरारनामा के सहारे खास महल की जमीन पर वर्षों से कब्जा किए हुए हैं।

इसके बाद इसी एग्रीमेंट को आधार बनाकर जमीन को दूसरे लोगों को बेचने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों को यह भी बताया जाता है कि एग्रीमेंट के आधार पर लंबे समय तक जमीन पर अधिकार बना रहेगा। इसी भरोसे में कई लोगों ने लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर भवन तक खड़े कर दिए हैं।

एग्रीमेंट को वर्षों का अधिकार बताने का आरोप

नियमानुसार इकरारनामा और लीज में बड़ा अंतर है। एग्रीमेंट अपने आप जमीन पर मालिकाना हक प्रदान नहीं करता। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ लोग ऐसे दस्तावेजों को वर्षों का अधिकार बताकर भोले-भाले लोगों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। खास महल की जमीन को निजी जमीन की तरह दिखाकर खरीद-बिक्री किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

कई मामलों में जमीन की वास्तविक स्थिति जाने बिना लोगों ने वहां निर्माण करा लिया। अब सर्वे के दौरान जमीन के मूल रिकॉर्ड, लीज की स्थिति, कब्जा और निर्माण की जांच होने से ऐसे मामलों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है।

30 वर्षों के लिए दी जाती है लीज

खास महल की जमीन सरकार की संपत्ति होती है। निर्धारित नियमों के तहत इसे विभिन्न उपयोग के लिए लीज पर दिए जाने का प्रावधान है। बागवानी, आवासीय मकान तथा निर्धारित शर्तों के तहत व्यावसायिक भवन निर्माण के लिए भी अनुमति दी जा सकती है। खास महल की जमीन 30 वर्षों के लिए लीज पर दिए जाने की व्यवस्था है। लीज की शर्तों और निर्धारित उपयोग का पालन करना जरूरी होता है।

आरोप है कि वैध लीज और सामान्य इकरारनामा के बीच अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोग जमीन को दूसरे लोगों के हाथ बेचने का काम कर रहे हैं। खास महल की कई ऐसी जमीनें भी जांच के दायरे में हैं, जिन पर वर्तमान में कब्जा तो है, लेकिन कब्जाधारी के पास वैध मालिकाना हक का स्पष्ट दस्तावेज नहीं है।

केसर हिंद की जमीन पर भी बड़े निर्माण

खास महल के अलावा केसर हिंद की जमीन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि फर्जी कागजात के सहारे कई जगहों पर मॉल और बड़े व्यावसायिक भवन तक खड़े कर दिए गए हैं। ऐसे मामलों में जमीन के मूल रिकॉर्ड, निर्माण की अनुमति और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शहरी क्षेत्र में करीब 796 एकड़ खास महल की जमीन

हजारीबाग के शहरी क्षेत्र में करीब 796 एकड़ खास महल की जमीन होने की जानकारी सामने आ रही है। इसमें करीब 136 एकड़ जमीन के रिज्यूम होने की बात कही जा रही है। वर्तमान में चल रहे सर्वे में खास महल की जमीन का रिकॉर्ड, लीज, कब्जा और वर्तमान उपयोग का मिलान किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद अवैध कब्जे और संदिग्ध दस्तावेजों के मामलों की स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

फर्जी कागजात के सहारे खरीद-बिक्री से बचें : सीओ

सदर सीओ सह खास महल पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने बताया कि खास महल की जमीन का सर्वे कार्य अभी चल रहा है। जल्द ही सर्वे का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सर्वे के दौरान जिन लोगों को चिन्हित किया जाएगा, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने लोगों से अपील की कि खास महल की जमीन की फर्जी कागजात के सहारे खरीद-बिक्री नहीं करें और किसी के बहकावे में आकर ऐसी जमीन में पैसा नहीं लगाएं। 

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