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हजारीबाग में खास महल की जमीन पर बड़ा खेल: 11 महीने के एग्रीमेंट पर खड़ी कर दी करोड़ों की इमारतें

Published: Sun, 20 Sep 2026 08:01 PM (IST)

हजारीबाग में खास महल की सरकारी जमीन पर फर्जी कागजात और 11 महीने के इकरारनामे के सहारे अवैध निर्माण का ...और पढ़ें

सरकार के आदेश के आलोक में खास महल पदाधिकारी के स्तर से पिछले छह महीने से जमीन का सर्वे कराया जा रहा है।

सरकार के आदेश के आलोक में खास महल पदाधिकारी के स्तर से पिछले छह महीने से जमीन का सर्वे कराया जा रहा है।

HighLights

  1. फर्जी कागजात और 11 महीने के इकरारनामे का उपयोग।

  2. भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी।

विनय कुशवाहा, हजारीबाग। शहर के शहरी क्षेत्र में खास महल की जमीन का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों प्रशासन की जांच के दायरे में है। 
 
राज्य सरकार के आदेश के आलोक में खास महल पदाधिकारी के स्तर से पिछले छह महीने से व्यापक ज़मीन सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे के दौरान ज़मीन से जुड़े कई चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं।
 
आरोप है कि कई भूमाफिया और रसूखदारों ने फर्जी कागजात और सामान्य इकरारनामे के सहारे सरकारी ज़मीन पर कब्जा कर लिया और देखते ही देखते वहां आलीशान मकान, शॉपिंग मॉल, व्यावसायिक भवन, होटल और रेस्टोरेंट खड़े कर दिए।
 

दीपूगढ़ा बना फर्जीवाड़े का मुख्य गढ़ 

प्रशासनिक जांच में सबसे अधिक मामले दीपूगढ़ा क्षेत्र से सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि यहां कुछ भूमाफिया महज 11 महीने के इकरारनामे (Agreements) के सहारे खास महल की ज़मीन पर वर्षों से काबिज़ हैं।
 
इसके बाद इसी एग्रीमेंट को आधार बनाकर ज़मीन को दूसरे लोगों को बेचा जा रहा है। आम लोगों को यह झांसा दिया जाता है कि एग्रीमेंट के आधार पर लंबे समय तक ज़मीन पर अधिकार बना रहेगा। 
 
इसी छलावे में आकर कई लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई के लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर बहुमंजिला भवन खड़े कर दिए हैं।
 

एग्रीमेंट और लीज का अंतर समझें 

नियमानुसार इकरारनामा (Agreement) और लीज (Lease) में जमीन-आसमान का अंतर है: 
  • इकरारनामा: यह एक सामान्य समझौता होता है, जो ज़मीन पर कोई मालिकाना हक प्रदान नहीं करता। 
  • लीज: खास महल की ज़मीन पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा दी जाती है।
 
इसके बावजूद कुछ लोग इकरारनामे को स्थायी अधिकार बताकर सीधे-साधे लोगों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। खास महल की सरकारी ज़मीन को निजी संपत्ति की तरह दिखाकर उसकी खरीद-बिक्री की जा रही है।
 

30 वर्षों के लिए दी जाती है खास महल की लीज 

खास महल की ज़मीन पूरी तरह से सरकार की संपत्ति होती है। नियमों के तहत इसे आवासीय, बागवानी या निर्धारित शर्तों पर व्यावसायिक उपयोग के लिए अधिकतम 30 वर्षों की लीज पर दिया जाता है। 
 
निर्धारित शर्तों और लीज का पालन करना अनिवार्य होता है। वर्तमान सर्वे में ज़मीन के मूल रिकॉर्ड, लीज की वैधता और वर्तमान निर्माण की बारीकी से जांच की जा रही है।
 

केसर हिंद की जमीन पर भी बने मॉल 

खास महल के अलावा केसर हिंद की ज़मीन को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि फर्जी कागजात तैयार कर शहर के कई हिस्सों में बड़े-बड़े मॉल और व्यावसायिक परिसर बना लिए गए हैं। मूल राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ऐसे अवैध निर्माणों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
 

आंकड़ों में हजारीबाग खास महल की जमीन 

कुल खास महल ज़मीन: करीब 796 एकड़ (शहरी क्षेत्र)
 
  • रिज्यूम हुई जमीन: लगभग 136 एकड़ 
  • चल रही प्रक्रिया: सर्वे में रिकॉर्ड, लीज, वास्तविक कब्जे और उपयोग का मिलान।
 

फर्जी कागजात के चक्कर में न पड़ें लोग : सदर CO 

सदर सीओ सह खास महल पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने बताया कि खास महल की ज़मीन का सर्वे कार्य अंतिम चरण में है। सर्वे पूरा होते ही चिन्हित किए गए अवैध कब्जाधारियों और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
 
उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे किसी के बहकावे में न आएं और खास महल या सरकारी ज़मीन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे खरीद-बिक्री से बचें, अन्यथा उन्हें भारी आर्थिक और कानूनी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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