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कौशल विकास ने बदली किस्मत: कभी खुद का गुजर-बसर था मुश्किल, आज दे रहे हैं दूसरों को रोजगार

Published: Tue, 27 Jan 2026 07:22 AM (IST)

सरकारी कौशल विकास और वित्तीय समावेशन कार्यक्रम हजारीबाग के युवाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। नव भारत जागृति केंद्र और ...और पढ़ें

कौशल विकास और वित्तीय समावेशन से बदली युवाओं की किस्मत। फोटो जागरण

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मासूम अहमद, हजारीबाग। सरकार के कौशल विकास और वित्तीय समावेशन कार्यक्रम युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक युवाओं को राष्ट्रीयकृत बैंकों से जोड़कर वित्तीय, तकनीकी एवं बाजार से संबंधित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे टिकाऊ आजीविका स्थापित कर सकें।

नव भारत जागृति केंद्र (एनबीजेके) द्वारा भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के सहयोग से हजारीबाग जिले में माइक्रो एंटरप्राइज प्रमोशन प्रोग्राम (एमईपीपी) का सफल संचालन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत कई युवा आत्मनिर्भर उद्यमी बनकर न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। इस कडी में आज हम बात कर रहे हैं हजारीबाग के दो युवाओं की जिन्होंने कौशल विकास और वित्तीय समावेशन से किस्मत बदल ली। उनके लिए कभी खुद का गुजर-बसर था मुश्किल मगर आज वे दूसरों को रोजगार दे रहे हैं।

शहर के इंद्रपुरी चौक निवासी सौरभ कुमार का शुरूआती जीवन मुश्किलों भरा था। मगर कौशल विकास और वित्तीय समावेशन ने उनकी जिंदगी बदल दी। सौरभ को पीएमएफएमई योजना के तहत यूनियन बैंक, पेलावल शाखा से पूंजीगत सहायता मिली, जिसमें 35 प्रतिशत अनुदान शामिल है। इस सहयोग से उन्होंने अपने मसाले के व्यवसाय का विस्तार किया।

शहर के इंद्रपुरी चौक के पास उन्होंने अपना जायका मसाला स्टोर की स्थापना की। वे आधुनिक मशीनों की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले मसालों का प्रसंस्करण और पैकेजिंग कर स्थानीय बाजार में आपूर्ति कर रहे हैं और लोगों के भोजन के जायके में इजाफा कर रहे है । वह खुद तो आत्मनिर्भर बने ही साथ ही साथ अब और तीन लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे है।

इसी तरह, बनहा गांव निवासी मुकेश साव पहले एक छोटे मैकेनिक के रूप में कार्य कर रहे थे। मुश्किल से गुजारा होता था। उन्होंने पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत भारतीय स्टेट बैंक, डेमोटांड शाखा से 35 प्रतिशत अनुदान सहित वित्तीय सहायता प्राप्त कर अब स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, रैंप, वॉशिंग सुविधा जैसी आधुनिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने एक सहायक को भी रोजगार दिया है।

पिछले दो वर्षों में एनबीजेके ने सिडबी-एमईपीपी कार्यक्रम के माध्यम से हजारीबाग जिले के 230 से अधिक युवाओं को बैंक ऋण से जोड़कर आत्मनिर्भर उद्यमी बनने में सहयोग किया है।

पीएमएफएमई केंद्र सरकार की योजना है जिसमें फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में जो भी अपनी ईकाई लगाना चाहते हैं उन्हें सरकार इस योजना अंतर्गत ऋण देती है । इसमें 35 प्रतिशत सब्सिडी मशीन पर सभी लोगों को मिलता है। इसका मुख्य उद्देश्य वोकल फार लोकल के तहत प्रोडक्ट इन फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना है साथ ही खाद्य सामान को पैकिंग करके मार्केटिंग को बढावा दिया जाता है।

वहीं मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड झारखंड में पीएमएफएमई योजना में क्रियान्वयन एजेंसी है। हर जिले में जिला रिसोर्स पर्सन है जो लोगों को इस योजना में आनलाइन आवेदन करके सहयोग करते हैं - श्रीश पति त्रिपाठी, जिला उद्यमी समन्वयक(मुख्यमंत्री लघु एंव कुटीर उद्यम विकास बोर्ड, उद्योग विभाग, हजारीबाग)