हजारीबाग : एक ओर पूर्व में राज्य के कुछ हिस्सों से भूख और भूख जनित बीमारियों से मौत की खबर आती रही है। वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा इस कलंक को चुनौती के रूप में लेते हुए खाद्य सुरक्षा कानून का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को खाद्य सुरक्षा की गांरटी दी जा रही है। इसी कड़ी में प्रमंडलीय मुख्यालय हजारीबाग में किसी भी हाल में भूख से मौत नहीं होने के चैलेंज को स्वीकार करते हुए खाद्य आपूर्ति अधिनियम के तहत समाज के कमजोर वर्गों को पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी मुखिया को 10-10 हजार रुपए इस मद में उपलब्ध है तो सभी सीओ को अन्नापूर्णा योजना भी मौजूद है। यानी जिले वासियो को खाद्य सुरक्षा की गांरटी दी जा रही है। दूसरी ओर जिले में हजारों की संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें संपन्न होते हुए भी समाज के कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित कार्ड बनवाकर उनका हक मार रहे हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित करने के लिए प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। उन्हें खुद से ऐसे कार्ड सरेंडर करने आखिरी मौका दिया गया है। अन्यथा बाद में उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। ज्ञात हो कि जिले में 256349 पीएच यानी प्राइमरी हाउस होल्ड कार्डधारी और 55349 अंत्योदय कार्डधारी यानी कुल 311698 परिवारों का राशन कार्ड बनाया गया है। वहीं 25963 सफेद राशन कार्ड भी बनाए गए है। पीएच और अंत्योदय कार्ड धारियों को प्रति माह एक रुपए प्रति किलो की दर से खाद्यान उपलब्ध कराया जाता है। पीएच कार्ड धारियों को प्रति सदस्य पांच किलो और अत्योदय कार्डधारियों को प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। माह दिसंबर 2018 में जिले के सभी प्रखंडों के 150018 लाभुकों के बीच 36532225 किलो चावल, 598727 किलो गेंहू, 395823 लीटर किरासिन तेल और 28896 किलोग्राम चीनी का वितरण किया गया। अंत्योदय लाभुकों को प्रति परिवार एक किलो चीनी प्रति माह सरकारी दर पर दिया जाता है। पीएच, अंत्योदय एवं सफेद कार्ड पर शहरी क्षेत्र में दो लीटर प्रति परिवार एवं ग्रामीण क्षेत्र में ढाई लीटर प्रति परिवार किरासिन तेल दिया जाता है। वहीं डाकिया योजना के तहत बिरहोर परिवारों को मुफ्त 35 किलो चावल का पैकेट उनके घर पहुंचाया जाता है। लाभुकों को खाद्यान्न व किरासिन तेल ई-पॉस मशीन के माध्यम से प्रदान किया जाता है। किरासिन तेल की सब्सिडी डीबीटी से सीधे लाभुकों के खाते में जमा की जाती है।

भूख से मौत का प्रश्न हीं नहीं

जिले में खाद्य सुरक्षा कानून का पूरी तरह से पालन हो रहा है। एक ओर पीएच और अंत्योदय कार्ड के माध्यम से लाभुकों को एक रुपए की दर से पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता तो दूसरी ओर सभी मुखिया को 10-10 हजार रुपए इस मद में उपलब्ध है तो सभी सीओ को अन्नापूर्णा योजना भी मौजूद है। इतना सब कुछ होने के बाद भी किसी की लापरवाही से ऐसी खबरें आएं तो यह दुभाग्यपूर्ण ही होगा। वैसे जिले में शत प्रतिशत लाभुकों को कवरेज में लिया जा रहा है तो दूसरी ओर गरीबों का हक मारने वाले भी चिन्हित किए जा रहे है - अल्बर्ट बिलुंग, जिला आपूर्ति पदाधिकारी।

Posted By: Jagran

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