हजारीबाग, [मासूम अहमद]। हजारीबाग संसदीय क्षेत्र जिसका प्रतिनिधित्व वर्तमान सांसद सह केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा कर रहे हैं और इसे भाजपा का गढ़ माना जाता है। इससे पहले उनके पिता और वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। मगर वास्तविकता यह दल ने पहली बार सन 1989 में जीत का स्वाद चखा था।

यानी प्रतिनिधित्व का अवसर प्राप्त करने के लिए भाजपा को 37 साल तक इंतजार करना पड़ा। सन 1989 में भाजपा प्रत्याशी प्रो. यदुनाथ पांडेय कांग्रेस प्रत्याशी दामोदर पांडेय को हरा कर सांसद बने थे। उस चुनाव के बाद से ही हजारीबाग संसदीय क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाने लगा।

शुरूआती दौर में हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में रामगढ़ राजघराने का वर्चस्व रहा था। सन 1957 में इस घराने की बहु ललिता राज लक्ष्मी जो राजा कामाख्या नारायण सिंह की पत्नी थीं ने चुनाव जीत कर सांसद बनी थी। उसके बाद से 1962, 1967, 1977 और 1980 में इसी घराने के बसंत नारायण सिंह ने हजारीबाग संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

सन 1984 में कांग्रेस के दामोदर पांडेय यहां से विजयी रहे थे और शायह यही यहां से कांग्रेस के लिए विराम और भाजपा के लिए शुरूआत साबित हुआ। अगले चुनाव यानी 1989 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में प्रो. यदुनाथ पांडेय ने कांग्रेस के दामोदर पांडेय को हराया। उसके बाद भाकपा के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने 1991 और 2004 में जीते। जबकि इसके अलावा बाकी के सभी चुनाव में भाजपा को ही जीत हासिल हुई।

सन 1996 में भाजपा के महावीर लाल विश्वकर्मा, 1998 में भी भाजपा के यशवंत सिन्हा, 1999 में इसी दल के यशवंत सिन्हा, 2009 में भाजपा के ही यशवंत सिन्हा और 2014 में भी श्री सिन्हा के पुत्र और वर्तमान सांसद जयंत सिन्हा चुनाव जीते थे। इस प्रकार कुछ चुनाव को छोड़ कर हजारीबाग संसदीय क्षेत्र भाजपा के गढ़ के रूप में स्थापित हो चुका है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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