अरविद राणा, हजारीबाग : सामान्यत: शांत समझे जाने वाले गजराज हजारीबाग में यूं ही उग्र नहीं हो गए हैं। बल्कि उनके उग्र होने के पीछे के कारण भी इंसान है, जिन्होंने उनके मार्ग में पड़ने वाले जंगल को नष्ट ही नहीं किया बल्कि वहां अपने घर भी बना दिए। गुरुवार को हजारीबाग के दारू के भराजो में अपने कॉरिडोर में पहुंचने वाली की जान ले गजराजों ने फिर अपने गुस्से का इजहार किया है। जानकार बताते हैं कि गजराज हर उस जगह हिसक हो रहे हैं जहां उनके पारंपरिक मार्ग को नष्ट किया गया या नुकसान पहुंचाया गया है। गिरिडीह के रास्ते विष्णुगढ़ क्षेत्र में प्रवेश करते हैं गजराज यह सर्वविदित है कि गजराज अपने निर्धारित मार्ग पर ही चलते हैं। अगर उस मार्ग में कोई बाधा बनता है तो उसे मिटाने में भी देर नहीं करते है। दुमका भाया गिरीडिह, हजारीबाग, लातेहार के रास्ते छत्तीसगढ़ जाने के लिए गजराजों का दल हजारीबाग से होकर गुजरता है। यह कारिडोर के रूप में चिह्नित है और वन विभाग इस क्षेत्र को बचाने का हर संभव प्रयास करता रहा है। हजारीबाग में गजराज दुमका से चलकर जामताड़ा भाया गिरिडीह के रास्ते बगोदर से होकर विष्णुगढ़ में प्रवेश करते हैं। अगर ये भटक जाते है तो फिर बरकटठा के रास्ते बरही पदमा, इचाक होकर पुन: टाटीझरिया, दारु होकर चुरचू । चरही के रास्ते होकर सदर प्रखंड के हरहद, कटकमदाग के रेश बेशाम होकर बड़कागांव, फिर वहां से केरेडारी चतरा के टंडवा होकर वे लातेहार चले जाते है। मार्ग में हर उस जगह मचाते है तबाही जहां इंसानों ने पहुंचाया है नुकसान गजराज हर उस स्थान पर जान माल का नुकसान करने से नहीं चुकते जहां उनके रास्ते में इंसानों ने डेरा डाला है। सदर प्रखंड का हरहद का चिमनी ईट भटठा इसका ज्वलंत उदाहरण है। गजराज के मार्ग पर बने इस भट्ठे से होकर जब भी गजराज गुजरते है भट्ठे को तहस-नहस करना नहीं भूलते। 2019 में यहां गजराजों ने भट्ठा में शो रहे एक महिला मजदूर और उसकी बेटी की जान ले ली थी। 2020 में गजराजों ने हमला बोला, परतुं मुखिया को पूर्व सूचना हो जाने के कारण भट्ठा में सो रहे मजदूरों को पंचायत भवन में बुला लिया। अगर उस रात देर हो जाती तो बड़ा नुकसान हो जाता। चरही घाटी में शौक से एनएच पर नहीं आते हाथी, नाली ने रोक दिया है रास्ता चुरचू से हाथी बड़कागांव की ओर जाने के लिए चरही घाटी मार्ग को अपनाते है। परंतु यहां भी विकास की रफ्तार ने उसका राह रोक दिया है। जब भी हाथियों का दल इधर से गुजरता है, उन्हें घंटों तक एनएच पर टहलते हुए देखा जाता है। इसके पीछे उनका शौक बल्कि परेशानी है। दरअसल घाटी में कहीं भी अंडरपास नहीं दिया गया है। वहीं हत्यारी मोड़ से चरही की ओर जाने में सीमेंट की नालियों का निर्माण किया गया है। चुरचू की ओर से आने के क्रम में उन्हें परेशानी नहीं होती परंतु जब वे वापस लौटते है तो उन्हें सड़क पार करने के लिए उस स्थान का प्रयोग करना पड़़ता है, जहां नाली नहीं है। ऐसे में वे बजरंग बली मंदिर से करीब तीन सौ मीटर एनएच पर चलकर यूपी मोड़ आना पड़ता है। यहां करीब 20 मीटर नाली नही है, जिसका उपयोग वे सड़क पार करने में करते है। वैकल्पिक मार्ग अमनारी घुघलिया में भी काट दिया गया है जंगल गजराजों के वैकल्पिक मार्ग अमनारी - घुघलिया मार्ग में भी लोगों ने जंगल काट दिया है। यहां पहले घने जंगल हुआ करता था। आज वहां बकरी चराने,मवेशियों को चराने के बहाने पौधों को नष्ट कर गया है। गरुवार को महिला भी बकरी लेकर जंगल गयी थी। यहां उसकी जान हाथियों ने ले ली।

Indian T20 League

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

kumbh-mela-2021