संवाद सूत्र बरकट्ठा (हजारीबाग) : प्रखंड के सिमरिया चुगलामो में अवैध पत्थर खनन मामले में बरकट्ठा थाने में पांच नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने खदान से 64 डेटोनेटर व जिलेटीन की छड़ें भी बरामद की है। पुलिस ने प्राथमिकी में अवैध खनन, से लेकर विस्फोट की धाराएं भी जोड़ी है। वहीं जंगल से बरामद पोकलेन के संचालक पर भी प्राथमिकी दर्ज की गयी है। थाने में प्राथमिकी जिला खनन पदाधिकारी संजय कुमार शर्मा के आवेदन पर दर्ज किया गया। प्राथमिकी में अवैध खदान संचालक अजय चौधरी, विजय चौधरी दोनों भाई बरकनगांगो निवासी, व संजय चौधरी चुगलामो निवासी, हरेंद्र चौधरी तिलैया कोडरमा निवासी जितेंद्र यादव को अभियुक्त बनाया गया है। थाना में कांड संख्या 28/21 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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वीडियो जारी कर विधायक ने अवैध माइनिग पर जताई आपत्ति, कहा उपायुक्त को भी लिखा था पत्र

प्रखंड क्षेत्र के सिमरिया अवैध खनन और ब्लास्टिग को लेकर विधायक बरकट्ठा अमित यादव ने कड़ी आपत्ति जताई है । दस वर्षो से खनन होने की बात कहते हुए वीडियो में वन विभाग के उपर अवैध धंधा करने का आरोप लगाया। कहा है कि दो दर्जन से भी अधिक अवैध माइंस बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र में संचालित हैं । बताया कि अवैध खदानों के खिलाफ विधानसभा सदन में मैं आवाज उठाउंगा। कहा कि खदान करीब पांच-दस वर्षों से संचालित है । इसपर मैंने उपायुक्त से लेकर वरीय अधिकारियों को अवगत करवाया। इसके बावजूद फोरेस्ट विभाग के द्वारा मोटा रकम वसूल कर इन खदानों को संचालित किया जा रहा है जो समझ से परे है।

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खत्म हो गए कई पहाड़, नदी को भी नहीं छोड़ा

बरकट्ठा में पहाड़ों व जंगलों के वजूद पत्थरों के अवैध उत्खनन की वजह से खतरे में पड़ गया है। प्रखंड में 22 से अधिक अवैध पत्थर खदान चल रहे है। यहां कई पहाड़ी का नामोनिशान मिट चुका है और कई पहाड़ का वजूद खत्म होने के कगार पर है। वर्षो से बरकट्ठा थाना क्षेत्र के चुगलामो पंचायत अंतर्गत सिमरिया जंगल में चल रहे अवैध पत्थर खदान पर अब प्रशासन ने संज्ञान ली है। पत्थर माफिया नदी को भी नहीं छोड़े, नदी में दिखने वाले पत्थर भी क्रशर को भेज दिए।

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अवैध था खदान तो रेंजर बार बार क्यों बता रहे थे वैध

चुगलामो के सिमरिया में खदान में विस्फोट के बाद परत दर परत सच सामने आ रहा है। सवाल बरकटठा रेंजर गोरख राम पर खड़ा हो रहा है। जो घटना के दिन से हीं अवैध खदान को वैध बता रहे थे। वहीं खनन पदाधिकारी ने भी इसे वैध होने की बात कहीं थी। अब जब मामले में उपायुक्त ने संज्ञान लिया है तो पदाधिकारी यू टर्न ले लिए है। जानकारी के मुताबिक रेंजर वन भूमि में खनन के लिए भारी रकम लेते थे। खदान भी वन भूमि पर है, जबकि घटना के दूसरे दिन उसे वन भूमि न बताकर गैर मजरुआ खास बताया जा रहा था।

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