संसू, चरही : केंद्र सरकार के लिए गए निर्णय के विरूद्ध में गुरुवार से कोल इंडिया में तीन दिवसीय हड़ताल की शुरुआत हो गई है। पांच प्रमुख मजदूर संगठन से जुड़े नेताओं ने सीसीएल हजारीबाग कोयला क्षेत्र के सभी परियोजनाओं में जाकर सारे कार्य को ठप करा दिया। पहली पाली में ही संयुक्त मोर्चा के मजदूर नेता झंडा-बैनर के साथ जीएम यूनिट से लेकर परियोजना गेट के पास पहुंचकर केंद्र सरकार के विरुद्ध नारेबाजी कर हड़ताल को सफल बनाने के लिए मजदूरों को काम से रोका। परियोजनाओं में उत्पादन से लेकर माल ढुलाई का कार्य पूरी तरह से ठप रहा। रेलवे को कोयले की आपूर्ति नहीं होने के कारण रेलवे साइडिग में रैक नहीं लगी। बीएमएस के क्षेत्रीय सचिव शंकर सिंह ने बताया कि पहले दिन का हड़ताल सौ फीसदी सफल रहा है। केंद्र सरकार कॉमर्शियल माइनिग लाने की जो प्रक्रिया शुरू की है,बिल्कुल ही मजदूर विरोधी नीति है। देश को पूंजीपतियों के हाथों गुलाम करने की साजिश रची जा रही है। निजीकरण नीति बिल्कुल ही हास्यास्पद नीति होगी। पहले दिन के हड़ताल में मजदूरों का भरपूर समर्थन मिलने के कारण हजारीबाग एरिया का हड़ताल सफल रहा। अगले दो दिनों के अंदर सरकार नहीं जागती है तो आवाम को यह समझ लेना चाहिए सरकार में मजदूरों के प्रति संवेदना है ही नहीं। एक मजदूर नेता ने सरकार के प्रति कटाक्ष करते हुए कहा कि निजीकरण देश के लिए इतना जरूरी है तो लगे हाथ संसद को भी निजीकरण कर ही देना चाहिए। अगुआई कर रहे विभिन्न मजदूर नेताओं में शंकर सिंह, रामलखन सिंह, लखराज सिंह, बसंत कुमार, द्वारिका सिंह, रियाज अंसारी, बलभद्र दास, दिलीप सिंह, सुरेश तिवारी, राजेन्द्र सिंह, बसंत राम, खुशिलाल महतो, मदन महतो, परमेश्वर भोक्ता, निसार अहमद, पुरन यादव,देवनारायण कुमार, रामचन्द्र गंझु समेत बीएमएस, इंटक, सीटू, एचएमएस, एटक आदि यूनियन से जुड़े लोग शामिल थे।

Posted By: Jagran

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