रमण कुमार, हजारीबाग: जिले में थैलेसेमिया के मरीजों, गर्भवती महिलाओं व आकस्मिक मरीजों सहित जरूरतमंदों को वक्त पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए ब्लड बैंक की स्थापना की गई। लेकिन वर्तमान समय में ब्लड बैंक में रक्त की घोर कमी है। अभी दो दिनों पूर्व टाटीझरिया प्रखंड के खंभा टोला के एक बिरहोर नवजात की मौत वक्त पर उसे रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण ही हो गई थी। डॉक्टरों ने गर्भवती को एबी पॉजिटिव रक्त उपलब्ध नहीं रहने के कारण रांची रिम्स रेफर कर दिया था, लेकिन बीच रास्ते में ही प्रसव हो जाने से नवजात की जान नहीं बचाई जा सकी थी। वहीं दो पूर्व गुमला में भी एक नवजात की मौत का कारण समय पर रक्त नहीं उपलब्ध हो पाना ही था। हालांकि ब्लड बैंक में रक्त की कमी को लेकर रक्त अधिकोष प्रभारी निर्मल जैन कहते हैं कोरोना संकट के संक्रमण के डर से स्वैच्छिक रक्तदान की काफी कमी के कारण पर्याप्त मात्रा में ब्लड बैंक में रक्त का संग्रहण नहीं हो पाता है। इससे जरूरतमंदों को वक्त पर रक्त नहीं मिल पाता है, जो उनकी मौत का कारण बन जाता है। ऐसे में यदि किसी की खून की आवश्यकता पड़ती है, तो उसे खुद ही व्यवस्था करनी पड़ती है।

समाज को होना होगा जागरूक

रेड क्रॉस सोसाइटी के पूर्व सचिव नीरज कुमार कहते हैं रक्त का कृत्रिम तौर पर निर्माण नहीं किया जा सकता है। रक्त पाने का एकमात्र तरीका स्वैचछिक रक्तदान ही है। ऐसे में आवश्यकता है कि समाज में स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने की, ताकि जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध करा कर उनकी जान बचाई जा सके। हालांकि ब्लड बैंक के रक्त अधिकोष प्रभारी निर्मल जैन ने अब तक 77 बार व पूर्व नीरज कुमार ने 40 बार से अधिक बार रक्तदान कर युवाओं को प्रेरित करने का कार्य कर रहें हैं, ताकि अधिक से अधिक संख्या में लोग स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर जागरूक हो पाएं।

Posted By: Jagran

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