विकास कुमार, हजारीबाग : जिले में पहले कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद सदर अस्पताल प्रबंधन व प्रशासन की लगातार घोर लापरवाही लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। लापरवाही की हद तो ये रही कि संक्रमित के 18 जून को अंतिम संस्कार के बाद पीपीई किट वहीं कोनार नदी तट पर खुले में फेंक दिया गया है। तीन पीपीई किट अभी भी वहीं पड़े हुए हैं। इसके पूर्व संक्रमित के शव के अंतिम संस्कार में भी काफी लापरवाही बरती गई थी। पहले शव को बीच शहर के मुक्तिधाम ले जाया गया वहां आपत्ति किए जाने के बाद उसे वापस सदर अस्पताल परिसर में रखा गया इसके कई घंटे शव का अंतिम संस्कार कोनार नदी घाट पर किया गया और पीपीई किट भी वहीं छोड़ दिया गया। प्रशासन की यह लापरवाही संक्रमण के बड़े खतरे को आमंत्रण दे रही है। नियमों के मुताबिक दाह संस्कार के तत्काल बाद पीपीई किट का डिस्पोजल तय प्रोटोकोल के अनुसार करना अनिवार्य है। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया। आसपास के लोगों को जब इसकी जानकारी मिली तो लोगों में डर का माहौल बन गया है। बताया जाता है कि यहां पास में एक निजी अस्पताल भी है जहां काफी संख्या में मरीजों का हर दिन आना-जाना होता है। खुले में पीपीई किट फेंके होने के कारण पशुओं के द्वारा इसे इधर-उधर किए जाने की संभावना बनी हुई है, जिससे खतरा बढ़ सकता है। मालूम हो कि हजारीबाग जिले में अब तक 162 कोरोना पॉजिटिव मामले आ चुके हैं। इनमें 121 ठीक हो चुके हैं जबकि एक की मौत हुई है। खुले में फेंकने से बीमारी फैलने की संभावना : डॉ. हीरा लाल साहा शहर के जाने माने चिकित्सक डॉ. हीरा लाल साहा ने बताया कि ऐसे खुले में पीपीई किट फेंकने से संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। यह खतरनाक है। दाह संस्कार के बाद तत्काल इसका डिस्पोजल नियमों के मुताबिक किया जाना चाहिए। -पीपीई किट को भी दाह संस्कार के बाद वहीं नष्ट कर देना था। यह लापरवाही है। मैं सिविल सर्जन से पूरे मामले की जानकारी लूंगा। तत्काल पीपीई किट को नष्ट करवाया जा रहा है।

डॉ. भुवनेश प्रताप सिंह, उपायुक्त हजारीबाग

Posted By: Jagran

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