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हादसे में जिंदगी बचाने की उम्मीद बनी एनएचएआई की एंबुलेंस, 1033 पर मिल रही है तत्काल मदद

Published: Fri, 30 Oct 2026 01:50 PM (IST)

गुमला-पलमा के 63 किमी लंबे NH-23 पर अब दुर्घटनाग्रस्त लोगों को तत्काल मदद मिलेगी। NHAI की एंबुलेंस और 1033 हेल्पलाइन ...और पढ़ें

गुमला-पलमा के 63 किमी लंबे एनएच-23 पर दुर्घटनाग्रस्त लोगों को मिलेगी तत्काल मदद।

गुमला-पलमा के 63 किमी लंबे एनएच-23 पर दुर्घटनाग्रस्त लोगों को मिलेगी तत्काल मदद।

HighLights

  1. NH-23 पर दुर्घटनाग्रस्त लोगों को तत्काल सहायता।

  2. 1033 हेल्पलाइन से एंबुलेंस, क्रेन की सुविधा।

  3. गोल्डन आवर में उपचार से बच रही हैं जानें।

जागरण संवाददाता, गुमला। सड़क पर हादसा होता है तो घायल की जिंदगी बचाने के लिए हर सेकेंड कीमती होता है। अस्पताल पहुंचने में हुई थोड़ी सी देरी भी किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है। ऐसे में दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर यानी शुरुआती महत्वपूर्ण समय में इलाज मिलना जिंदगी और मौत के बीच का अंतर साबित होता है।

गुमला से पलमा तक एनएच-23 के 63 किलोमीटर लंबे सफर में अब घायलों के लिए उम्मीद की नई किरण जगी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की एंबुलेंस और 1033 हेल्पलाइन आपात स्थिति में मददगार बन रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटना होने या वाहन खराब पड़ने की स्थिति में 1033 टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर काल कर सहायता मांगी जा सकती है। इसके माध्यम से एंबुलेंस, पेट्रोलिंग वाहन और क्रेन की मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इससे दुर्घटनास्थल पर समय रहते पहुंचने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद मिलती है।

एनएचएआई की एंबुलेंस जीपीएस, वीटीएस ट्रैकिंग और टू-वे रेडियो जैसी सुविधाओं से लैस है। इसमें प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है, जिससे अस्पताल पहुंचने से पहले घायल को जरूरी मदद दी जा सकती है। अक्सर सरकारी एंबुलेंस के देर से पहुंचने या पर्याप्त संसाधन नहीं होने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में हाईवे पर उपलब्ध एंबुलेंस दुर्घटना पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

गुमला-पलमा मार्ग की लंबाई 63 किलोमीटर है। राजमार्ग पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक 60 किलोमीटर पर एक एंबुलेंस की व्यवस्था का लक्ष्य है। एनएचएआइ जल्द ही दूसरी एंबुलेंस सेवा भी शुरू करने की तैयारी में है, ताकि आपात स्थिति में घायलों तक जल्द पहुंचा जा सके। सड़क पर हादसे के बाद मदद का हर मिनट किसी परिवार के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है।

इस वर्ष के अक्टूबर माह में अलग अलग दुर्घटनाओं में कुल 20 घायलों को पीएचसी व सदर अस्पताल पहुंचाया गया है। इनमें से कई गंभीर रुप से घायल मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया और समय से इलाज होने से घायल की जान बच सकी।

22 अक्टूबर को सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई थी। जबकि गंभीर रुप से घायल निदेश उरांव को सदर अस्पताल लाया गया था। जहां समय पर उसका उपचार हुआ।

हाइवे पर यात्रा करने वालों की सुरक्षा एनएचएआइ की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनएचएआइ राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से सुरक्षित, सुगम और आधुनिक परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हे। दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में घायल का समय पर इलाज कर उसकी जान बचाना प्राथमिकता है।
-कुमार गौतम, परियोजना निदेशक, एनएचएआई गुमला