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गुमला में ब्लड बैंक का लाइसेंस रद होने से बढ़ी परेशानी, थैलेसेमिया से जूझ रहे बच्चों के पेरेंट्स ने प्रशासन से मांगी मदद

Published: Wed, 01 Apr 2026 05:36 PM (IST)

गुमला में थैलेसेमिया और सिकल सेल से पीड़ित बच्चों के माता-पिता ने उप विकास आयुक्त से मुलाकात की। उन्होंने ब्लड ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, गुमला। थैलेसेमिया और सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के माता-पिता बुधवार को अपनी समस्याओं को लेकर समाहरणालय पहुंचे। उन्होंने उपायुक्त से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उपायुक्त के कार्यालय में नहीं रहने के कारण अभिभावकों ने उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो से मुलाकात कर अपनी स्थिति से अवगत कराया।

लाइसेंस रद होने से स्थिति गंभीर

अभिभावकों ने बताया कि थैलेसेमिया और सिकल सेल से पीड़ित बच्चों को हर 15 से 20 दिनों के अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। इसके लिए उन्हें बार-बार बच्चों को लेकर ब्लड बैंक आना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानी भी बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि जब से ब्लड बैंक का लाइसेंस रद हुआ है, तब से स्थिति और गंभीर हो गई है। अब डोनर उपलब्ध कराने के बाद भी रक्त मिलने में एक सप्ताह या उससे अधिक समय लग जाता है। अभिभावकों के अनुसार, ब्लड बैंक से लगभग 20 यूनिट रक्त रिम्स भेजा जाता है, लेकिन जांच के बाद मात्र पांच यूनिट ही वापस मिल पाता है।

ब्लड नहीं मिलने से बच्चों को कई तरह की समस्याएं

समय पर रक्त नहीं मिलने से बच्चों का हीमोग्लोबिन (एचबी) प्रतिशत लगातार कम होने लगता है, जिससे उन्हें कमजोरी, भूख न लगना और बुखार जैसी समस्याएं होने लगती हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित बच्चों को नियमित और समय पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि उनके जीवन को सुरक्षित रखा जा सके।

अनुरोध करने वालों में ज्योति कुमारी, आशा देवी, दिलीप तुरी, पूर्णिमा उरांव, सुखमनी मिंज, दिलीप प्रजापति, अरविंद कुमार मिश्रा, दमयंती देवी, फूलमनी देवी, श्वेता कुमारी, तारामुनी डुंगडुंग आदि शामिल थे।

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