संवाद सहयोगी, गुमला : अखिल भारतीय कानूनी जागरुकता और आउटरीच अभियान 'भारत की आजादी का अमृत महोत्सव' के तहत मंगलवार को पालकोट प्रखंड में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को जागरुक किया गया। मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव आनंद सिंह ने दहेज निरोधक कानून के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समाज से दहेज की विकृति को खत्म करने लिए 1961 में दहेज निरोधक कानून बनाया गया था, जिसके अनुसार दहेज लेना ही नहीं, दहेज देना भी अपराध है। दहेज लेने और देने पर कानूनी प्रावधान है। दहेज निरोधक कानून की धारा-3 के तहत दहेज देना अपराध है, जिसके तहत जुर्म सिद्ध होने पर कम से कम 5 साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना लगाने की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही कोर्ट दहेज के मूल्यांकन के अनुसार भी जुर्माना कर सकती है। इसमें ही धारा-4 के तहत दहेज मांगना अपराध है, जिसके तहत कम से कम छह महीने और अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा आईपीसी में भी दफा 498ए के तहत दहेज प्रताड़ना के लिए सजा का प्रावधान है। इस धारा को गैर जमानती और संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में रखा गया है। महिला की मौत शादी से 7 साल के भीतर रहस्यमय या असमान्य हालात में होती है तो उस पर दहेज हत्या का केस चलेगा। ये भी गैर जमानती अपराध है, जिसमें दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है। मौके पर मुख्य रुप से पैनल अधिवक्ता मदन मोहन मिश्रा,प्रकाश कुमार, मनीष, हसीब, पीएलवी वीणा कुमारी, जरीना खातुन, नवीना साहु, जोसेफ किडो, तित्रू उरांव आदि उपस्थित थे।

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