संवाद सूत्र, कामडारा (गुमला) : प्रखंड अंतर्गत सुरहू पंचायत के मुखिया विश्वासी केरकेट्टा के बेरोजगार पुत्र संदीप केरकेट्टा को कड़कनाथ मुर्गी पालन रास आने लगा है। अब वह आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा चुका है। संदीप के कड़कनाथ मुर्गी पालन को गांव के अन्य युवा भी देखने और समझने का काम कर रहे हैं। कड़कनाथ मुर्गी पालन के क्षेत्र में संदीप बेरोजगार युवकों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुका है। बेरोजगार संदीप ने रांची बीआइटी मेसरा स्थित मुर्गी पालन केंद्र में मुर्गी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। संदीप को जब लगा की मुर्गी पालन उसके अनुकूल रोजगार है तब आम मुर्गी से इतर उसने कड़कनाथ मुर्गी पालन को अपना रोजगार चयन किया। 70 रुपये प्रति पीस के दर से संदीप ने कड़कनाथ मुर्गा का पांच सौ चूजा लाया था। पांच सौ चूजा में कुल पूंजी 35 हजार और उसके लिए दाना दो हजार सात सौ रुपये का लिया था। चूजा अब डेढ़ माह का हो गया। मुर्गा का वजन ढाई सौ ग्राम से आधा किलो ग्राम तक हो गया है। संदीप केरकेट्टा ने बताया कि कड़कनाथ मुर्गी व मुर्गा का कीमत खुले बाजार मे एक हजार से बारह सौ रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है जबकि ओडिशा और बंगाल के थोक व्यापारी पांच सौ रुपये प्रति किलो की दर से बाहर ले जाते हैं।

कड़कनाथ मुर्गा की खासियत

कड़कनाथ मुर्गा या मुर्गी में विटामीन बी 1, बी 2, बी 6, बी 12 और बीसी, बीई, प्रोटीन प्रचुर मात्रा पायी जाती है। वसा बहुत कम होता है। इसलिए इसे औषधीय गुणों वाला मुर्गा कहा गया है। कड़कनाथ मुर्गा का मांस को हृदय एवं डायबिटीज रोगियों के लिए लाभकारी माना गया है।

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