जागरण संवाददाता, गुमला : गुमला प्रखंड के मुरकुंडा गांव के मनरखन महतो को मधु उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने और शहद उत्पादन से डेढ़ सौ से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए बीस अक्टूबर को रांची के मोरहाबादी मैदान के शहीद स्मृति सभागार में झारखंड सेवा रत्न का पुरस्कार विश्व सेवा परिषद द्वारा दिया जाएगा। इस मधुमक्खी पालक का अजीब दास्तान है। बचपन में शहद का स्वाद अच्छा लगता था। यहीं से मधुमक्खी पालन की प्रेरणा उन्हें मिली थी। आठवीं कक्षा में मधुमक्खी पालन का आरंभ हुआ प्रयास आज इन्हें उस मुकाम तक पहुंचा दिया है जहां डेढ़ सौ से अधिक लोगों के प्रेरणा के स्त्रोत बन गए हैं। मनरखन कहते हैं कि पहले मधुमक्खी को पकड़ कर मिट्टी के बर्तन में रखा करते थे। उसे पालते थे और शहद तैयार करते थे। बाद में मैट्रिक पास करने के बाद कॉलेज में आए और पढ़ाई पूरी कर रांची के रामकृष्ण मिशन विद्यायन कृषि केंद्र से उन्होंने मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया था। बैंक में उन्हें जाने की चाहत थी लेकिन वे बैंक की सेवा में नहीं जा सके। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बताया किया था कि अनाज के उत्पादन से शहद में पांच गुणा आय संभव है। फिलहाल उन्होंने एक हजार आठ सौ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिलाने का काम कर चुके हैं उनमें से 150 से अधिक लोग मधुमक्खी पालन कर जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने मात्र दो बक्सा से मधुमक्खी पालन की शुरूआत की थी, लेकिन अब उनके पास 12 सौ बक्से हैं। इस साल सरगुजा से 14 से 15, सरसों से 18 से 19, लीची से 52, करंज से 53 क्विटल शहद का उत्पादन किया है।

आयुर्वेदिक दवा से मधुमक्खियों को बचाने का करते हैं काम

मनरखन कहते हैं कि मधुमक्खियों में भी रोग लगता है। आठ पैर वाले सूक्ष्म कीड़ा मधुमक्खियों में लगते हैं जिसे मधुमक्खी मरते हैं। पशुओं में भी आठ पैर वाले कीड़ा लगते हैं जिसे आठ गोड़वा कहते हैं। पशुओं में लगने वाले इस कीड़े को मारने के लिए ग्रामीण जड़ी बूटी से किसान दवा बनाया करते थे। उसी तर्ज पर उन्होंने मधुमक्खियों में लगने वाले कीड़े को मारने के लिए दवा बनाने पर लगभग 11 साल अनुसंधान किया। अचूक दवा बनकर तैयार हो चुकी है। बाजार में दवा उतारने के लिए पेटेंट करना जरूरी हो गया है।

नहीं है बाजार की समस्या

मनरखन महतो बताते हैं कि शहद बेचने के लिए बाजार खोजने की जरूरत नहीं है। उनका संपर्क बड़ी कंपनियों से हैं जो उनके यहां से शहद ले जाकर रिफाइन करते हैं।

फुड प्रोसेसिग की है चाहत

मनरखन कहते हैं कि यदि झारखंड के हर जिला में शहद तैयार करने के लिए एक-एक फुड प्रोसेसिग सेंटर की स्थापना हो जाए तो कंपनियों पर शहद के मोडीफिकेशन की सुविधा मिल जाएगी और उत्पादकों को पूरा-पूरा लाभ मिल जाएगा।

Posted By: Jagran

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