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बिशुनपुर (गुमला) : टीके लगने के बाद बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सबक लेने के बजाय लीपापोती की कोशिश लगातार मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। पलामू के लोइंगा गांव में टीका लगने से चार बच्चों की मौत और छह बच्चों के बीमार हो जाने की घटना के अभी दो दिन भी नहीं बीते थे कि अब गुमला के बिशुनपुर स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को एक नवजात शिशु की बीसीजी और हेपेटाइटिस का टीका लगने के बाद मौत हो गई। पलामू मामले में जहां अधिकारियों को बचाते हुए एएनएम को पर निलंबन की कार्रवाई की गई वहीं इस मामले में भी सुरक्षा और नियमों का ध्यान रखे बगैर बच्चे को टीका देने का मामला ही सामने आ रहा है।

बताया जाता है कि स्वास्थ्य केन्द्र बिशुनपुर में बहूद्देशीय कार्यकर्ता ¨बदेश्वर नाग ने बसिया गांव के कुम्हारी तलसरी गांव निवासी ¨बदेश्वर नाग की पत्नी पुष्पा देवी को मंगलवार को प्रसव के लिए भर्ती कराया था। पुष्पा ने रात 10 बजे एक बच्चे को जन्म दिया। दूसरे दिन बुधवार को बच्चे को बीसीजी और हेपेटाइटिस के टीके लगाए गए। टीका लगने के कुछ घंटे के बाद बच्चे ने दिन लगभग डेढ़ बजे दम तोड़ दिया।

--- आमने-सामने ----

डॉक्टर ने कहा - टीके से नहीं पहले से तबीयत खराब होने के कारण हुई मौत अस्पताल के चिकित्सक डॉ.अंकुर ने बताया कि जन्म के बाद नवजात की स्थिति ठीक नहीं थी। नवजात के मुंह में मल आ गया था। इससे सांस लेने में उसे कठिनाई हो रही थी। उसके बाद नर्स ने उस बच्चे को टीका लगाया। चिकित्सक के अनुसार टीका लगने के बाद बच्चा की स्थिति में सुधार हो रही थी।

परिजन बोले - टीका लगाने के बाद बिगड़ी बच्चे की हालत

परिजनों के अनुसार टीका लगने के बाद बच्चा के शरीर में कंपन होने लगा था। पुष्पा देवी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि जन्म लेने के बाद बच्चा स्वस्थ्य था। दिन के डेढ़ बजे नर्स ने बच्चा को टीका लगाया। उसके कुछ देर बाद ही बच्चे की मौत हो गई।

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परिजनों ने किया हंगामा

नवजात शिशु की मौत हो जाने के बाद उसकी मां पुष्पा देवी ने हंगामा मचाया। चिकित्सकों से उसकी नोंकझोंक भी हुई। बच्चे की मौत के बाद मां गहरे सदमे में थी। उसने बताया कि चिकित्सक बार-बार बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार होने की बात कर रहे थे। बच्चे के मौत के बाद चिकित्सक हालत खराब होने की बात बताकर अपना पाला झाड़ रहे हैं। यदि बच्चे की स्थिति अच्छी नहीं थी तो रेफर क्यों नहीं किया गया। नवजात के पिता ¨बदेश्वर नाग का कहना है कि वह अपने बच्चे को इलाज के लिए बाहर ले जाना चाहते थे, लेकिन चिकित्सक ने उसे रेफर नहीं किया। ¨बदेश्वर का कहना है कि चिकित्सक यदि बच्चा को रेफर कर देते तो रात में ही उसे बाहर ले जाकर इलाज करवाता। ----

शव ले जाने के लिए भी एंबुलेंस नहीं देने का आरोप परिजनों का आरोप है कि जब मृत बच्चे का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग गई तो चिकित्सकों ने देने से मना किया। वह एंबुलेंस का किराया मांग रहे थे। बाद में कुछ स्थानीय लोगों ने मामले में हस्तक्षेप कर जब प्रभारी चिकित्सक से बातचीत की गई तो उसे एंबुलेंस उपलब्ध कराया गया।

--------- सुलगते सवाल

- अगर बच्चे की तबीयत खराब थी तो उसे हड़बड़ी में टीका क्यों दिया गया

- टीका लगाने से पहले बच्चे की जांच की जरूरत क्यों नहीं समझी गई

- डॉक्टर खुद कह रहे हैं कि बच्चे को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी, ऐसी हालत में टीका देने से पहले विशेषज्ञों की राय क्यों नहीं ली गई

- बच्चे की हालत अगर खराब थी तो उसे रेफर क्यों नहीं किया गया, जबकि अभिभावक बच्चे को रेफर करने का आग्रह कर रहे थे

- टीका लगाने से पहले परीक्षण के सामान्य नियमों की भी अनदेखी क्यों हुई

- टीका लगने से पलामू में हुई चार बच्चों की मौत के बाद भी विभाग ने सबक क्यों नहीं लिया

- क्या स्वास्थ्यकर्मियों में टीका लगाने के लिए जरूरी प्रशिक्षण की कमी है, अगर हां, तो इस खतरनाक स्थिति को सुधारने के लिए विभाग गंभीर क्यों नहीं?

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Posted By: Jagran

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