गोड्डा : बिहार के बांका और भागलपुर जिले की सीमा से लगी संताल परगना की महत्वपूर्ण विधान सभा सीट गोड्डा में विरासत की सियासत हावी रही है। इन दिनों यहां की सियासत परवान चढ़ हुई है। भाजपा ने एक बार फिर अपने सीटिग विधायक अमित मंडल पर ही भरोसा करते हुए आसन्न चुनाव के लिए पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है। ऐसे में यहां के राजनीतिक हालात और अतीत के इतिहास पर चर्चा मौजूं है। यहां के सीटिग विधायक अमित मंडल अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी से हैं जिन्हें यहां की जनता ने गत विधानसभा के उपचुनाव में प्रतिनिधित्व का अवसर दिया था। इससे पहले अमित मंडल के पिता रघुनंदन मंडल भाजपा के टिकट पर यहां से विधायक रह चुके हैं वहीं अमित मंडल के दादा अर्थात रघुनंदन मंडल के पिता सुमृत मंडल ने यहां झामुमो के टिकट पर विधान सभा चुनाव जीत चुके हैं। इनकी असली परीक्षा इस बार के आम चुनाव में होगी जिसमें उन्हें अपने कार्यों और छवि के बल पर एक बार फिर जनता से आशीर्वाद लेना है।

वर्ष 2016 में भाजपा विधायक रघुनंदन मंडल की आकस्मिक मौत के बाद हुए उपचुनाव में अमित मंडल को जनता ने हाथों हाथ उठाकर प्रदेश की सर्वोच्च पंचायत का कमान सौंपा था। वर्ष 2016 के उपचुनाव में पहली बार गोड्डा में उच्च योग्यताधारी लोग राजनीति में उतर रहे थे। एक ओर भाजपा के प्रत्याशी अमित मंडल जो इंग्लैंड के ब्रांडफोर्ड विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री हासिल कर राजनीति के अखाड़े में उतरे थे वहीं झामुमो प्रत्याशी संजीव मरीक जो आइपीएस थे, वे ओडीशा के डीजीपी पद से दिसंबर 2015 में सेवानिवृत हुए थे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि उपचुनाव में भाजपा और झामुमो प्रत्याशी के पिता गोड्डा के विधायक रह चुके थे। गोड्डा से विधायक अमित मंडल के पिता रघुनंदन मंडल भाजपा के विधायक रहे वहीं झामुमो प्रत्याशी संजीव मरीके पिता मणिलाल यादव भी गोड्डा के विधायक रह चुके थे। वहीं अमित के दादा सुमृत मंडल भी झामुमो के टिकट पर वर्ष गोड्डा से दो बार विधायक रह चुके थे। सृमृत मंडल जब झामुमो के फाइनेंसर हुआ करते थे। पथरगामा के कोरका गांव में सुमृत मंडल की विरासत आज भी नजर आती है। सुमृत मंडल वर्ष 1985 से 90 तथा 1995 से 2000 तक गोड्डा के विधायक रहे थे।

Posted By: Jagran

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